बीजिंग, चीन , 29 जून
चीन की राजनीति और सेना में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां देश की टॉप पार्लियामेंट (National People’s Congress) से 6 वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है और कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह कदम राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एंटी-करप्शन (भ्रष्टाचार विरोधी) मुहिम का हिस्सा है या फिर सेना के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित “बगावत के डर” से जुड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हटाए गए सभी अधिकारी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे और देश की रक्षा व रणनीतिक फैसलों में उनकी अहम भूमिका थी। इन अधिकारियों को अचानक हटाए जाने से यह संकेत मिल रहा है कि चीनी नेतृत्व सेना और राजनीतिक ढांचे के भीतर सख्त नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के जरिए पार्टी और सेना दोनों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इस अभियान के तहत कई बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। अब 6 और कमांडरों की छुट्टी को इसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। चीन की सेना के भीतर हाल के समय में कुछ असंतोष और गुटबाजी की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में इन अधिकारियों को हटाना इस बात का संकेत भी हो सकता है कि नेतृत्व किसी भी संभावित आंतरिक चुनौती या बगावत के खतरे को पहले ही खत्म करना चाहता है।
बीजिंग में सत्ता के गलियारों में इस कदम को बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े स्तर पर सैन्य नेतृत्व में बदलाव किया गया हो। पिछले कुछ वर्षों में भी कई वरिष्ठ जनरल और रक्षा अधिकारियों को पद से हटाया या जांच के दायरे में लाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, खासकर अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों द्वारा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सेना में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर चीन की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल चीनी सरकार की ओर से इन हटाए गए अधिकारियों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, जिससे अटकलें और भी तेज हो गई हैं।
कुल मिलाकर यह मामला चीन की सत्ता संरचना में गहराते नियंत्रण, राजनीतिक शुद्धिकरण और संभावित आंतरिक तनावों की ओर इशारा करता है।







