इंदौर के भागीरथपुरा जल कांड में बड़ा खुलासा, भूमिगत जल तक पहुंचा मलमूत्र जनित बैक्टीरिया; NGT में पेश हुई जांच रिपोर्ट
भोपाल/इंदौर, 24 जुलाई।
मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा इलाके में पिछले वर्ष दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की संयुक्त जांच में पाया गया कि क्षेत्र के भूमिगत जल और कुछ बोरवेल के नमूनों में मलमूत्र जनित ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने व्यापक जांच की। जांच में सामने आया कि सीवेज का प्रदूषण पेयजल स्रोतों और भूमिगत जल तक पहुंच गया था, जिससे जलजनित संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ी। विशेषज्ञों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।
यह जांच उस घटना के बाद कराई गई थी, जिसमें भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने के बाद कई लोग बीमार पड़े थे। जांच रिपोर्ट में इस घटना को अत्यंत गंभीर माना गया है और कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, सीवेज लाइन और जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी आवश्यक है।
NGT में सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने कहा कि इंदौर में जल प्रदूषण और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मामले पहले से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भी विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। NGT ने भी रिपोर्ट की प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध कराने और निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भागीरथपुरा में हुई त्रासदी के बाद जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार, पाइपलाइन की जांच, सीवेज रिसाव रोकने और नियमित जल परीक्षण जैसे कदम उठाने की सिफारिश की गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
ध्यान दें: वर्तमान जांच रिपोर्ट पिछले वर्ष भागीरथपुरा में हुई जल प्रदूषण घटना से संबंधित है। विभिन्न रिपोर्टों में 36 मौतों का उल्लेख जांच के संदर्भ में किया गया है, जबकि अलग-अलग समय पर मौतों के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर भिन्न दावे भी सामने आए थे। अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी निष्कर्ष न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होंगे।







