सांसद रमेश बिधूड़ी ने मुल्ला”, “कटुआ”, “आतंकवादी” और “भड़वा” जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।
नई दिल्ली, 1 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल रात अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए नीट (NEET) प्रदर्शन के दौरान उन्हें दी गई गालियों का ज़िक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह उस समय हैरान रह गए थे, जब उन्हें और उनकी दिवंगत माता के लिए बेहद आपत्तिजनक और भद्दी गालियां दी गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भटके हुए हैं और उन्हें अदालतों के चक्कर कटवाने के बजाय समझाकर सही राह पर लाना बेहतर होगा। इसी के साथ प्रधानमंत्री ने उस लड़की को माफ करते हुए कहा, “मैं उसे माफ करता हूं।”
आंदोलन के माहौल में दूसरों को देखकर वह बहक गई थी
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री को गाली देने वाली लड़की का नाम रुचिका सिंह है। नोएडा पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामला दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया है। इसके बाद रुचिका सिंह का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह खुद को 15 साल की बताती है। वीडियो में वह कहती है कि आंदोलन के माहौल में दूसरों को देखकर वह बहक गई थी, जिसकी वजह से उसने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द कहे। उसने अपने किए पर शर्म जताते हुए माफी मांगी और कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती थी।
सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया
प्रधानमंत्री का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष और उनके आलोचकों ने भी उन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पूर्व भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी का वह वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने उस समय समाजवादी पार्टी के सांसद (अब कांग्रेस में) दानिश अली के लिए “मुल्ला”, “कटुआ”, “आतंकवादी” और “भड़वा” जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक टीवी डिबेट का वीडियो भी साझा किया, जिसमें भाजपा के एक प्रवक्ता विपक्षी प्रवक्ता की मां के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। इन वीडियो के आधार पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछे जाने लगे कि क्या ऐसे मामलों में भी समान संवेदनशीलता और कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्रवाई एक ही नियम और समान मानकों के तहत होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। एक पक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद पर हैं और उनके खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे गलत संदेश जाता है। वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। चाहे कोई भी व्यक्ति किसी को गाली दे, कार्रवाई एक ही नियम और समान मानकों के तहत होनी चाहिए।







