थैलसीमिया पीड़ितों के लिए प्रेरणादायी कदम, मुकेश गुलिया ने 38वीं तो राजेश डुडेजा ने 148वीं बार किया रक्तदान
भिवानी, 8 अगस्त। थैलसीमिया से पीड़ित बच्चों के जीवन को संबल देने के लिए भिवानी में मानवता और सेवा की प्रेरणादायी मिसाल देखने को मिली। जिले के जागरूक रक्तदाताओं ने थैलसीमिया ग्रस्त बच्चों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान कर समाज के सामने सेवा और समर्पण का उदाहरण पेश किया।
इस अवसर पर एडवोकेट मुकेश गुलिया ने 38वीं बार रक्तदान किया, जबकि शतकवीर रक्तदाता राजेश डुडेजा ने अपने जीवन का 148वां रक्तदान कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। दोनों रक्तदाताओं का यह प्रयास नियमित रक्तदान के महत्व और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।
रक्तदान शिविर को सफल बनाने में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। डा. रोहित महला, स्टाफ नर्स ममता, लैब टेक्नीशियन प्रदीप और नवीन कुमार की देखरेख एवं सहयोग से शिविर का आयोजन व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न हुआ।
इस मौके पर एडवोकेट मुकेश गुलिया और राजेश डुडेजा ने कहा कि थैलसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है और इससे पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का आगे आना इन बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान से जरूरतमंद मरीजों की मदद करने के साथ-साथ समाज में मानवता, संवेदना और सेवा की भावना को भी मजबूत किया जा सकता है। थैलसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयास उनके परिवारों का हौसला बढ़ाते हैं और अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं।
भिवानी में आयोजित यह रक्तदान पहल समाज में स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। रक्तदाताओं का यह समर्पण दूसरे जिलों के लोगों को भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने का संदेश देता है।







