गुरुग्राम में अवैध निर्माण पर बड़ा एक्शन, 8 जोनों में करीब 30 इमारतें ध्वस्त; कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
गुरुग्राम, 10 अगस्त। साइबर सिटी गुरुग्राम में अवैध और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी है। सोमवार को नगर निगम की टीमों ने शहर के आठों जोनों में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर करीब 30 अवैध एवं अनधिकृत भवनों को ध्वस्त किया। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर निर्माणाधीन और तैयार हो चुके भवनों को तोड़ा गया।
हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही शहर में एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर जिन इमारतों को तैयार होने में महीनों और कई बार वर्षों का समय लगता है, उनका निर्माण प्रशासनिक अधिकारियों की नजरों से कैसे बचता रहा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में अवैध निर्माण लंबे समय तक चलता रहता है। जब निर्माण पूरा हो जाता है और इमारत तैयार हो जाती है, उसके बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू की जाती है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते निर्माण रोक दिया जाए तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भवनों को गिराने की नौबत ही न आए।
आठों जोनों में चला अभियान
नगर निगम गुरुग्राम की ओर से अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को तेज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध रूप से निर्मित भवनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
नगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया के अनुसार, अभियान के तहत करीब 30 ऐसे भवनों को गिराया गया, जिनका निर्माण बड़े स्तर पर किया गया था।
इनमें कई भवन ऐसे बताए जा रहे हैं जिन्हें तैयार करने में लंबे समय तक निर्माण कार्य चला और जिनमें लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
नगर निगम का कहना है कि अनधिकृत निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

निर्माण के बाद कार्रवाई पर सवाल
गुरुग्राम में अवैध निर्माण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में अवैध भवनों का निर्माण शुरू होने से लेकर उनके तैयार होने तक प्रशासनिक अमला मौजूद रहता है। इसके बावजूद समय रहते निर्माण पर रोक नहीं लगाई जाती।
लोगों का सवाल है कि जब किसी भूखंड पर कई मंजिल का भवन तैयार हो रहा होता है तो संबंधित विभाग के अधिकारी उस समय कार्रवाई क्यों नहीं करते?
क्यों ऐसा होता है कि निर्माण पूरा होने के बाद ही भवन को अवैध बताकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होती है?
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण अवैध निर्माण करने वालों का हौसला बढ़ता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
अवैध भवनों पर कार्रवाई के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में ये निर्माण खड़े हुए, उनकी जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की जाती?
लोगों का कहना है कि यदि किसी इलाके में कई मंजिला इमारत बिना अनुमति के तैयार हो गई तो संबंधित विभाग के निरीक्षण और निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक ओर प्रशासन करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवनों को गिरा रहा है, वहीं दूसरी ओर सवाल यह है कि इन भवनों के निर्माण के दौरान निगरानी व्यवस्था कहां थी।
यही वजह है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अवैध भवन गिराना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में अवैध निर्माण शुरू ही न हो।
डीटीपी विभाग की भूमिका पर भी सवाल
गुरुग्राम में अवैध निर्माण पर कार्रवाई में डीटीपी विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। शहर में अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर किसी इलाके में लगातार अवैध निर्माण हो रहा है तो संबंधित अधिकारियों को समय रहते इसकी जानकारी होनी चाहिए।
निर्माण शुरू होने के समय कार्रवाई करने के बजाय भवन तैयार होने के बाद कार्रवाई करने से सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।
स्थानीय स्तर पर लोगों का यह भी कहना है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में अवैध निर्माण तेजी से बढ़े, उनसे भी जवाब मांगा जाना चाहिए कि आखिर उनके कार्यकाल में कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सोशल मीडिया को लेकर भी चर्चा
अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के बीच कुछ अधिकारियों की सोशल मीडिया सक्रियता को लेकर भी चर्चा होती रही है।
डीटीपी अधिकारी आरएस भाट का नाम भी सोशल मीडिया पर सक्रियता को लेकर चर्चा में रहा है। हालांकि किसी अधिकारी की सोशल मीडिया सक्रियता को अवैध निर्माण से जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
असल सवाल यह है कि प्रशासनिक विभाग अवैध निर्माण को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी निगरानी कर रहा है।
अवैध कॉलोनियों का भी बढ़ता दायरा
गुरुग्राम में केवल अवैध भवन ही नहीं, बल्कि अवैध कॉलोनियों को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई जगह पहले कॉलोनियां विकसित होती हैं, फिर प्लॉट बिकते हैं, लोग मकान बनाते हैं और बड़ी संख्या में परिवार वहां रहने लगते हैं।
जब कॉलोनी में हजारों लोग बस जाते हैं, उसके बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू होती है।
ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर मकान बनाया होता है।
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन को किसी कॉलोनी के अनधिकृत होने की जानकारी पहले से होती है तो शुरुआत में ही निर्माण और प्लॉटिंग पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती?
सरकारी जमीन पर हजारों झुग्गियों का सवाल
गुरुग्राम की दूसरी बड़ी समस्या सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियां भी हैं।
साइबर सिटी के नाम से देश और दुनिया में पहचान बनाने वाले गुरुग्राम के कई हिस्सों में सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर बड़ी संख्या में झुग्गियां बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर सरकारी जमीन पर इतने बड़े पैमाने पर कब्जे कैसे हो गए?
अगर सरकारी जमीन पर लंबे समय से झुग्गियां बनी हुई हैं तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
झुग्गियों से किराया वसूली का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आता रहा है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियों से किराया वसूला जाता है।
हालांकि इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
सवाल यह है कि यदि सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियों से वास्तव में किराया वसूला जा रहा है तो यह पैसा कौन ले रहा है और किस आधार पर?
स्थानीय लोग प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
अवैध निर्माण रोकने के साथ सिस्टम की भी जांच जरूरी
गुरुग्राम में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन का सख्त रुख सामने आ रहा है। लेकिन कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि अवैध निर्माण की शुरुआत ही क्यों हुई, इसकी जांच हो।
अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति के बहुमंजिला इमारत बनाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण शुरू होने से लेकर भवन तैयार होने तक संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी।
सिर्फ इमारत गिराने से अवैध निर्माण का खेल खत्म नहीं होगा।
जरूरत इस बात की है कि अवैध निर्माण की शुरुआत में ही कार्रवाई हो, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो और निर्माण माफिया तथा अवैध कॉलोनाइजेशन पर प्रभावी निगरानी की जाए।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में अगर अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जे इसी तरह बढ़ते रहे तो इसका असर शहर की योजना, ट्रैफिक, जल निकासी, बिजली, सीवर और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग सिर्फ अवैध इमारतों को गिराने तक सीमित रहते हैं या फिर अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले पूरे सिस्टम की भी जिम्मेदारी तय करते हैं।






