गुरुग्राम 24 अगस्त / गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने के बाद शुरू हुआ सियासी विवाद अब खुलकर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने दो जिलाध्यक्षों पंकज डावर और वर्धन यादव के लापता होने के विरोध में पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। वहीं भाजपा ने भी पलटवार करते हुए पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने और काले झंडे दिखाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।कांग्रेस के प्रदर्शन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदय भान प्रमुख रूप से मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने पुलिस और सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारियां चिंता का विषय हैं।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए, न कि विरोध करने पर FIR और गिरफ्तारी का सहारा लेना चाहिए।पूरा विवाद 21 अगस्त से शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम पहुंचे थे। इसी दौरान कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन यादव और शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काले झंडे दिखाए और विरोध जताया। कांग्रेस का कहना था कि गुरुग्राम में टूटी सड़कों, जलभराव, सफाई और दूसरी नागरिक समस्याओं को लेकर सरकार का ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शन किया गया था।इसके बाद पुलिस ने मामले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया। वही कांग्रेस के नेताओ का कहना है की जल्द से जल्द गिरफ्तार कार्यकर्ताओं पर दर्ज एफआईआर केंसिल कर उन्हें छोड़ा जाए अन्यथा पुरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन होगा।
बता दे की पंकज डावर और वर्धन यादव समेत 12 लोगों को नामजद किया गया। दोनों जिलाध्यक्षों के फोन बंद बताए जाने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर वे कहां हैं। हालांकि पुलिस की ओर से उनकी हिरासत को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।उधर भाजपा ने भी कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा गुरुग्राम जिलाध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ACP धर्मबीर के सामने मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश और काले झंडे दिखाने की घटना का मुद्दा उठाया तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। एक तरफ कांग्रेस इसे अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई बताकर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा मुख्यमंत्री की सुरक्षा में सेंध और काफिले को रोकने की कोशिश को गंभीर मामला बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।







