गुरुग्राम। आचार्य पुरोहित संघ के अध्यक्ष एवं कथावाचक पं. अमर चन्द भारद्वाज ने बताया कि गणेशोत्सव 2026 की पूर्णाहुति शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर होगी। धार्मिक परंपरा एवं पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी गणपति बप्पा की मुख्य विदाई एवं विसर्जन का प्रमुख दिवस माना जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीगणेश की स्थापना अनंत चतुर्दशी तक रखने का संकल्प लिया है, वे 25 सितंबर को प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर गणपति जी की विधिवत पूजा-अर्चना, धूप-दीप, पुष्प, दूर्वा, नैवेद्य एवं आरती करने के पश्चात उत्तरपूजा संपन्न करें और श्रद्धापूर्वक गणपति बप्पा को विदाई दें।
विसर्जन से पूर्व भगवान श्रीगणेश की पुनः पूजा एवं आरती करें।
गणपति विसर्जन के प्रमुख शुभ समय प्रातः 6:11 बजे से 10:42 बजे तक, दोपहर 12:13 बजे से 1:43 बजे तक तथा सायंकाल 4:44 बजे से 6:14 बजे तक बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा, सुविधा एवं निर्धारित विसर्जन स्थल के अनुसार शुभ समय में विसर्जन कर सकते हैं।
विसर्जन की संक्षिप्त विधि: विसर्जन से पूर्व भगवान श्रीगणेश की पुनः पूजा एवं आरती करें। उन्हें पुष्प, दूर्वा, नैवेद्य तथा फल अर्पित करके अपने संकल्प की पूर्णता के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद उत्तरपूजा एवं क्षमा-प्रार्थना करके गणपति जी को श्रद्धापूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। विसर्जन के समय भगवान श्रीगणेश का स्मरण करते हुए उन्हें जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करें। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित कृत्रिम विसर्जन कुंड अथवा निर्धारित स्थान का उपयोग करना उचित है।
हे गणपति महाराज! आप अपने दिव्य स्थान को पधारें
विसर्जन प्रार्थना: ॐ गं गणपतये नमः। गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थानं परमेश्वर।
इष्टकामसमृद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
अर्थात्—हे गणपति महाराज! आप अपने दिव्य स्थान को पधारें और हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारे सभी मनोरथ पूर्ण हों तथा आप अगले वर्ष पुनः हमारे घर पधारें।
कथावाचक पं. अमर चन्द भारद्वाज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि गणपति विसर्जन को केवल एक धार्मिक परंपरा के रूप में न लेकर श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण के साथ संपन्न करें तथा भगवान श्रीगणेश से परिवार एवं समाज के सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।







