दिल्ली 23 सितम्बर / हरियाणा भवन की सुरक्षा पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री और राज्यपाल के ठहराव कक्ष से चंद कदम की दूरी पर 25 लाख रुपये से भरा बैग लेकर एक शख्स फरार हो गया। घटना की जानकारी जैसे ही हरियाणा भवन के अधिकारियों तक पहुंची, पूरे भवन में हड़कंप मच गया। जिस परिसर में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के ठहरने की व्यवस्था है और जहां हर वक्त सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता है, वहीं एक शख्स से 25 लाख रुपये की ठगी हो गई। मामला अब सिर्फ 25 लाख रुपये की ठगी का नहीं रहा , बल्कि हरियाणा भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि ठग ने पहले स्वामीनारायण मंदिर के कैशियर से दोस्ती की, फिर अपनी पहचान और रसूख का भरोसा दिलाया और आखिरकार उसे सस्ते डॉलर दिलाने के लालच में ऐसा फंसाया कि 25 लाख रुपये उसके हाथ में पहुंच गए।

शिकायत के मुताबिक, दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित स्वामीनारायण मंदिर के अकाउंटेंट वसंत पांचाल की करीब पांच महीने पहले चिराग पटेल नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी। आरोप है कि चिराग ने खुद को चाणक्यपुरी स्थित अमेरिकी एंबेसी में जेएलएल कंपनी के जरिए फेसेलिटी मैनेजमेंट का काम करने वाला बताया और यहीं से शुरू हुआ भरोसे का खेल।शिकायत के मुताबिक, चिराग ने वसंत को बताया कि उसके पास अमेरिकी एंबेसी के कॉन्सुलेट से डॉलर आते हैं और वह बाजार भाव से कम कीमत पर डॉलर दिला सकता है। उस समय बाजार में डॉलर करीब 96-97 रुपये के आसपास बताया गया, जबकि आरोपी ने करीब 92 रुपये प्रति डॉलर में डॉलर देने का भरोसा दिया। सिर्फ डॉलर ही नहीं… आरोप है कि उसने वसंत की बहू को जेएलएल कंपनी में नौकरी दिलाने और उसका इंटरव्यू कराने का भरोसा भी दिया। यानी एक तरफ सस्ते डॉलर का लालच और दूसरी तरफ नौकरी का भरोसा… धीरे-धीरे वसंत का विश्वास जीतने की कोशिश की गई।

20 सितंबर को मंदिर कार्यालय में ट्रस्ट और बैंक खाते से जुड़ी नकदी की गिनती चल रही थी। इसी दौरान आरोप है कि चिराग की नजर करीब 25 लाख रुपये की रकम पर पड़ी। उसने इसी रकम को डॉलर में बदलवाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि अगले दिन वह अमेरिकी एंबेसी के कॉन्सुलेट से डॉलर लेकर आएगा।21 सितंबर को वसंत पांचाल अपने बेटे श्रेयेश और बहू अनुपमा के साथ 25 लाख रुपये लेकर हरियाणा भवन पहुंचे। दोपहर करीब डेढ़ बजे हरियाणा भवन की कैंटीन में उनकी चिराग से मुलाकात हुई। आरोप है कि चिराग ने 25 लाख रुपये से भरा बैग अपने कब्जे में लिया और डॉलर लेकर वापस आने की बात कही। इसके बाद वह बैग लेकर हरियाणा भवन से बाहर निकल गया। वसंत और उनका परिवार इंतजार करता रहा… लेकिन चिराग वापस नहीं आया। समय बीतता गया और जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार को ठगी का एहसास हुआ। पुलिस को सूचना दी गई। तिलक मार्ग थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया।

अब जांच के केंद्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शख्स ने 25 लाख रुपये लेकर हरियाणा भवन से बाहर निकलने की बात सामने आई है, वह आखिर कहां गया? पुलिस अब आरोपी के कथित अमेरिकी एंबेसी कनेक्शन, जेएलएल कंपनी से उसके संबंध, सस्ते डॉलर उपलब्ध कराने के दावे और नौकरी दिलाने के भरोसे की भी जांच कर रही है। साथ ही हरियाणा भवन में उसकी एंट्री, कैंटीन में मौजूदगी और वहां से बाहर निकलने की CCTV फुटेज भी अहम मानी जा रही है।फिलहाल FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। हालांकि शिकायतकर्ता के बयान में चिराग पटेल का नाम सामने आया है। पुलिस ने BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है अगर हरियाणा भवन जैसे हाई-सिक्योरिटी परिसर में 25 लाख रुपये की ठगी के बाद एक शख्स आसानी से बाहर निकल जाता है, तो वहां की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है? और अब हरियाणा भवन प्रशासन के साथ-साथ सरकार को भी इस सवाल का जवाब देना होगा कि आखिर सुरक्षा के इतने बड़े घेरे के बीच 25 लाख रुपये लेकर निकलने वाला शख्स नजरों से कैसे बच गया?







