गुरुग्राम, 01 अक्टूबर।
राजकीय कन्या महाविद्यालय, सेक्टर-14, गुरुग्राम में नगर निगम चुनाव के लिए इस्तेमाल की गई चुनाव सामग्री लंबे समय से कॉलेज परिसर में रखे होने का मामला अब सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खरखड़ा ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग, गुरुग्राम जिला प्रशासन, उच्चतर शिक्षा विभाग, गुरुग्राम विश्वविद्यालय सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फरवरी 2025 में हुए नगर निगम चुनाव के बाद से चुनाव सामग्री महाविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में रखी हुई है। शिकायत के मुताबिक कॉमर्स ब्लॉक के कमरा नंबर 59 और 108 के अलावा कम्प्यूटर विभाग की पूरी इमारत और प्रयोगशालाओं में भी चुनाव संबंधी सामग्री रखी गई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक इन स्थानों का इस्तेमाल भंडारण के लिए किए जाने से विद्यार्थियों के नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

26 सितंबर 2025 को जारी हुआ था सामान हटाने का आदेश
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उपलब्ध सरकारी आदेश के अनुसार गुरुग्राम उपायुक्त कार्यालय की ओर से 26 सितंबर 2025 को चुनाव सामग्री हटाने के संबंध में लिखित निर्देश जारी किए गए थे। आदेश में उल्लेख किया गया था कि नगर निगम चुनाव-2025 के दौरान राजकीय कन्या महाविद्यालय, सेक्टर-14 की इमारत को चुनाव कार्य के लिए इस्तेमाल किया गया था। इसमें कॉमर्स ब्लॉक के प्रथम तल के कमरा नंबर 59 और 108 तथा कम्प्यूटर विभाग की पूरी इमारत शामिल थी। आदेश में यह भी दर्ज किया गया था कि संबंधित कमरों और प्रयोगशालाओं में चुनाव संबंधी सामग्री रखी हुई है, जिसके कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उपायुक्त कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि उक्त कमरों, कम्प्यूटर विभाग की इमारत और प्रयोगशालाओं में रखी चुनाव सामग्री को हटाकर तहसीलदार, गुरुग्राम के माध्यम से राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा, पंचकूला के मुख्यालय के स्टोर में जमा कराया जाए।
आदेश के बावजूद सामान नहीं हटने पर सवाल
शिकायतकर्ता प्रकाश खरखड़ा ने सवाल उठाया है कि जब प्रशासन की ओर से सितंबर 2025 में ही चुनाव सामग्री हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए थे, तो इसके बाद भी सामग्री कॉलेज परिसर में क्यों पड़ी रही।उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने स्वयं यह माना था कि चुनाव सामग्री के कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो संबंधित आदेश का पालन सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी थी। उन्होंने मांग की है कि मामले में यह भी जांच होनी चाहिए कि लिखित आदेश जारी होने के बाद भी चुनाव सामग्री को निर्धारित स्थान पर जमा कराने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई और इसमें देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
‘शैक्षणिक कमरों का इस्तेमाल भंडारण के लिए क्यों?’

प्रकाश खरखड़ा ने शिकायत में कहा है कि राजकीय कन्या महाविद्यालय छात्राओं की शिक्षा के लिए स्थापित संस्थान है। ऐसे में कॉलेज के कमरों, कम्प्यूटर विभाग और प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल लंबे समय तक चुनाव सामग्री रखने के लिए किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामग्री को निर्धारित सरकारी स्टोर में पहुंचाया जाना चाहिए था। यदि शैक्षणिक परिसर में सामग्री लंबे समय तक रखी गई है तो प्रशासन को इसके कारणों को स्पष्ट करना चाहिए।
कम्प्यूटर विभाग और कक्षाओं को लेकर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से कम्प्यूटर विभाग की पूरी इमारत और प्रयोगशालाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन सुविधाओं का सीधा संबंध छात्राओं की पढ़ाई से है। उनकी मांग है कि चुनाव सामग्री हटाए जाने के बाद संबंधित कमरों और कम्प्यूटर विभाग का निरीक्षण कराया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी शैक्षणिक सुविधाएं छात्राओं के लिए पूरी तरह उपलब्ध हैं। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित स्थानों को तत्काल शैक्षणिक उपयोग के लिए बहाल करने की मांग भी की है।
कई विभागों और अधिकारियों को भेजी शिकायत
इस मामले में शिकायत की प्रतियां राज्य निर्वाचन आयोग, उपायुक्त गुरुग्राम, उच्चतर शिक्षा विभाग, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं। चूंकि मामला छात्राओं से संबंधित सरकारी महाविद्यालय का है, इसलिए शिकायत की प्रति हरियाणा राज्य महिला आयोग को भी भेजे जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मामले को केवल चुनाव सामग्री हटाने तक सीमित न रखते हुए छात्राओं को उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों से जुड़े विषय के रूप में देखने की मांग की है।

48 घंटे में कार्रवाई की मांग
प्रकाश खरखड़ा ने अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर चुनाव सामग्री हटाने, प्रभावित कमरों और कम्प्यूटर विभाग को शैक्षणिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने तथा लंबे समय तक सामग्री पड़े रहने के कारणों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शिकायत में जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है कि प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद भी यदि उसका पालन नहीं हुआ तो इसके लिए कौन अधिकारी या विभाग जिम्मेदार है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं है, बल्कि सरकारी महाविद्यालय की शैक्षणिक सुविधाओं और छात्राओं के हित से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो छात्राओं और अभिभावकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग, जिला प्रशासन, उच्चतर शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। यह देखना होगा कि कॉलेज परिसर में रखी चुनाव सामग्री को कब तक हटाया जाता है और छात्राओं के लिए निर्धारित कक्षाओं तथा कम्प्यूटर विभाग को पूरी तरह शैक्षणिक उपयोग के लिए कब उपलब्ध कराया जाता है।









