नई दिल्ली, 7 अक्टूबर।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी सांसदों के बड़े प्रदर्शन और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं की हिरासत के बाद अब विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला और तेज होने की बात सामने आ रही है। दिल्ली के साथ-साथ बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में विपक्षी दलों की ओर से प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों और विपक्षी नेताओं ने संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च शुरू किया। इस मार्च में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और वाम दलों के नेता भी शामिल हुए। विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। मार्च को दिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी और बड़ी संख्या में पुलिस तथा सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी पुलिस बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर धरना शुरू कर दिया।
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
कई घंटे तक चले इस धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद नेताओं को वहां से ले जाया गया। बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्षी दल इस पूरे मामले को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांग रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि मंगलवार को शाम करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों या संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को पहले से निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक का अनुरोध करना होता है। आयोग ने एक वरिष्ठ अधिकारी को प्रदर्शन स्थल पर भेजकर ज्ञापन लेने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
दिल्ली में मंगलवार की घटना के बाद राजधानी की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब विपक्ष की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग के खिलाफ अपने अभियान को दिल्ली से बाहर राज्यों तक ले जाने की बात कह रहे हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में विपक्षी कार्यकर्ताओं और नेताओं के प्रदर्शन की तैयारियां जारी हैं। दिल्ली में मंगलवार की घटना के बाद राजधानी की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग कार्यालय, संसद मार्ग और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की और कई स्थानों पर आवाजाही को भी नियंत्रित किया। मंगलवार के प्रदर्शन में कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेता इसे चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े सवालों का मुद्दा बता रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राजनीतिक विरोध के नाम पर व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने और अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया है। अब 7 अक्टूबर को सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली समेत अलग-अलग राज्यों में विपक्ष का प्रदर्शन किस रूप में सामने आता है। खास तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में विपक्षी दलों की गतिविधियों पर निगाह रहेगी। अगर अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन तेज होता है तो आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, SIR और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।









