बिहार, 6 मार्च 2026
बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी बवाल देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी फैल गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
जेडीयू के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास त्रिलोक पटना में मुख्यमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठ गए हैं। हाथ में बैनर लेकर वह नीतीश कुमार से बिहार नहीं छोड़ने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री को दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा। अमरेंद्र दास का कहना है कि जरूरत पड़ी तो वह अपनी जान भी दे देंगे, लेकिन नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने नहीं देंगे।
दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति में जा सकते हैं। इसी खबर के बाद जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया।
पिछले एक दिन से पूरे बिहार में जेडीयू कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर भी जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़ की और कई नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की। इतना ही नहीं, एमएलसी संजय गांधी की गाड़ी को भी घेर लिया गया और विरोध जताया गया।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह एक राजनीतिक साजिश है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जबरन दिल्ली भेजने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर ही वोट दिया था, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर कालिख भी पोत दी, जिससे माहौल और ज्यादा गरमा गया। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जेडीयू और बीजेपी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज शाम अपने आवास पर जेडीयू के सभी विधायकों, सांसदों और विधान पार्षदों की अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में वह अपने राजनीतिक भविष्य और राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर पार्टी नेताओं को जानकारी दे सकते हैं।
बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले करीब 20 वर्षों से नीतीश कुमार राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में अगर वह दिल्ली की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिलहाल जेडीयू कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत होता नजर नहीं आ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या नीतीश कुमार अपने फैसले पर कायम रहते हैं या पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हैं।







