नई दिल्ली/ओडिशा। 17 मार्च
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा हलचल पैदा कर दिया है। खासतौर पर ओडिशा में हुई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस और विपक्ष की रणनीति को गहरा झटका दिया है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने अपने ही तीन विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
दरअसल, ओडिशा में कांग्रेस के तीन विधायक—रमेश चंद्र जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस—ने पार्टी के आधिकारिक निर्देशों के खिलाफ जाकर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया। इस क्रॉस वोटिंग का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा और कांग्रेस-बीजेडी के संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने इस घटना को गंभीर अनुशासनहीनता और जनता के विश्वास के साथ धोखा बताया है। पार्टी के अनुसार, विस्तृत समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है और संबंधित विधायकों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, इन बागी विधायकों को विधानसभा में कांग्रेस के साथ बैठने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
गौरतलब है कि ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने क्रॉस वोटिंग के कारण जीत दर्ज की।
सिर्फ ओडिशा ही नहीं, बल्कि बिहार और हरियाणा में भी क्रॉस वोटिंग ने विपक्ष को नुकसान पहुंचाया है। बिहार में महागठबंधन अतिरिक्त सीट जीतने से चूक गया, जबकि हरियाणा में कांग्रेस को अपनी सीट बचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इन घटनाओं के बाद कांग्रेस अब देशभर में अपने विधायकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
फिलहाल, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं और विपक्ष की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।







