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भारत में LPG संकट और अर्जेंटीना की अहम भूमिका!

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26 मार्च 2026।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से देश में एलपीजी यानी रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। ध्यान दें कि दुनिया के करीब 20% ईंधन की सप्लाई इसी मार्ग से होती है और भारत अपने 85–90% एलपीजी आयात के लिए इसी पर निर्भर है।

अर्जेंटीना का सहयोग

मुश्किल समय में दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना भारत का नया सहयोगी बनकर सामने आया। 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को लगभग 50,000 टन एलपीजी भेजी, जो 2025 के पूरे साल की सप्लाई से दोगुनी से अधिक है। इसमें से लगभग 39,000 टन संघर्ष शुरू होने से पहले ही भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को 11,000 टन की और खेप आई।

अर्जेंटीना के राजदूत ने भी कहा कि उनके देश के पास बड़े गैस भंडार हैं और वे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में और बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा कंपनियों की बातचीत भी जारी है, जिससे भविष्य में यह साझेदारी और मजबूत होगी।

उत्पादन क्षमता और भविष्य

अर्जेंटीना अपनी एलपीजी उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। जनवरी 2026 में वहां लगभग 2.59 लाख टन एलपीजी का उत्पादन हुआ। सालाना उत्पादन बढ़कर 2.63 मिलियन टन तक पहुंच गया है। बाहिया ब्लैंका में नई गैस प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने वाली है, जिससे निर्यात क्षमता और बढ़ेगी और भारत को दीर्घकालिक सप्लाई का भरोसा मिलेगा।

भारत की स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक,भारत में एलपीजी की मांग और सप्लाई के बीच अभी भी लगभग 15% का अंतर है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत स्पॉट कार्गो खरीद रहा है और वैकल्पिक ईंधनों जैसे PNG, कोयला और लकड़ी का भी उपयोग बढ़ रहा है।

हालांकि स्थिति अभी तक संभाल ली गई है, लेकिन अगर सप्लाई में और बाधा आती है, तो उद्योगों और घरों पर असर पड़ सकता है। लंबी आपूर्ति बाधा की स्थिति में लागत बढ़ सकती है और सबसे पहले तेल कंपनियां, फिर सरकार, और अंत में आम उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ेगा।

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Author: New India News Network

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