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ममता बनर्जी को बड़ा झटका ! वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने TMC को लगाई फटकार !

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पश्चिम बंगाल, 1 अप्रैल।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर अदालत ने साफ कहा— “ऐसा हर बार होता है, यह कोई नई बात नहीं है।”

 क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा किए जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने हजारों फॉर्म जमा किए, जिससे गड़बड़ी की आशंका है।

 कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा:

“अगर किसी को आपत्ति है, तो वह चुनाव आयोग के सामने रखी जा सकती है। कोर्ट हर तकनीकी आपत्ति पर दखल नहीं देगा।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना या हटाना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें घबराने की जरूरत नहीं है।

 चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि नियमों के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख तक नए मतदाताओं को जोड़ा जा सकता है।
यानी यदि कोई हाल ही में 18 साल का हुआ है, तो उसे वोटर बनने का अधिकार मिलेगा।

ट्रिब्यूनल और ट्रेनिंग पर विवाद

अपीलेट ट्रिब्यूनल को ट्रेनिंग देने के मुद्दे पर भी बहस हुई। टीएमसी ने इस पर सवाल उठाए, लेकिन कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक ओरिएंटेशन है और इसे अनावश्यक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।

साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में काम कर रहे जजों को राजनीतिक दबाव से दूर रखा जाना चाहिए।

अब तक की प्रगति

  • करीब 47 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा हो चुका है
  • रोजाना लगभग 2 लाख मामलों पर कार्रवाई हो रही है
  • अदालत को उम्मीद है कि 7 अप्रैल तक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव उसी मतदाता सूची के आधार पर होंगे, जो तय समय तक फाइनल हो जाएगी। इसके बाद जुड़े नाम इस चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

फिलहाल, अदालत ने मामले को बंद नहीं किया है, लेकिन संकेत दिया है कि तकनीकी आपत्तियों से ज्यादा जरूरी पूरी प्रक्रिया को समझना है।

अब सबकी नजर 7 अप्रैल पर है, जब इस मामले में अगला बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

 

New India News Network
Author: New India News Network

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