- विश्व शांति केंद्र में ‘सनातन धर्म की जय हो’ गीत का लोकार्पण प्रख्यात धर्माचार्यों ने किया।
- सनातन ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “अहिंसा परमो धर्मः” जैसे आदर्श दिए – आचार्य लोकेश
- सनातन प्रकृति के शाश्वत नियमों और सृष्टि के सिद्धांतों पर आधारित है – आचार्य प्रमोद कृष्णम
- सनातन एकता ही विश्व शांति का आधार- स्वामी दिपांकर
- विश्व शांति केंद्र सनातन की एकता का केंद्र बन गया हैं – स्वामी धर्मदेव
- सनाधर्म की जय’ जगद्गुरु हंसदेवाचार्य का सपना – स्वामी लोकेशदास
गुरुगरम , 30 मई 2026।
अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश, कल्कि धाम के संस्थापक आचार्य प्रमोद कृष्णम, महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव, स्वामी दीपांकर, महामंडलेश्वर नवल किशोर दास महंत लोकेश दास ने विश्व शांति केंद्र गुरुग्राम में ‘सनातन धर्म की जय हो’ गीत का लोकार्पण किया।

विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेश ने कहा कि “सनातन धर्म की जय हो” केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, मानवता और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति आस्था एवं सम्मान की अभिव्यक्ति है | यह उद्घोष भारत की उस महान सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है जिसने विश्व को “वसुधैव कुटुम्बकम्”, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “अहिंसा परमो धर्मः” जैसे सार्वभौमिक आदर्श दिए हैं।
कल्कि धाम के संस्थापक आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि सनातन शाश्वत प्रकृति से निर्मित है | सनातन जीवन-दर्शन किसी व्यक्ति, कालखंड या विशेष परिस्थिति की देन नहीं, बल्कि प्रकृति के शाश्वत नियमों, सार्वभौमिक सत्य और सृष्टि के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। सत्य, अहिंसा, करुणा, प्रेम, त्याग, तपस्या और बलिदान इसके स्तम्भ है |
महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव एवं स्वामी दिपांकर ने कहा कि विश्व शांति केंद्र में सनातन एकता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला | आचार्य लोकेश अमेरिका की शांति सद्भावना यात्रा के दौरान सनातन को विश्व जन्ममानस तक ले जाएंगे ऐसा हमें अटूट विश्वास है |

महंत नवलकिशोर दास एवं महंत लोकेशदास ने कहा कि सनातन युगों-युगों से मानवता को शांति, समरसता, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाती रही है, आज विश्व को इसकी आवश्यकता है ।
हरीश अरोडा क्रीऐशन द्वारा निर्मित गीत के लोकार्पण के अवसर पर फलाहारी बाबा, प्रख्यात समाजसेवी रुपसिंह नागर , डॉ.दिनेश उपाध्याय, विकास शर्मा, लोकेश शर्मा सहित अनेक सनातन प्रेमी उपस्थित थे |







