संसद में छात्रों के मुद्दे पर गरमाई सियासत, प्रियंका गांधी और संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली, 21 जुलाई। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को छात्रों के प्रदर्शन, कथित पेपर लीक और दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों का मुद्दा संसद से लेकर संसद परिसर तक गूंजता रहा। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को छात्रों के भविष्य और हालिया पुलिस कार्रवाई को लेकर घेरा, जबकि सरकार ने दोहराया कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि देश का छात्र वर्ग अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों युवाओं का विश्वास कमजोर हुआ है और उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
प्रियंका गांधी ने कहा, “छात्र अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। जिस प्रकार से लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है। छात्र और उनके परिवार मानसिक तनाव में हैं। ऐसे समय में सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए, लेकिन इसके बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। आखिर छात्रों के परिजन क्या सोच रहे होंगे?”
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने सख्ती की।
संजय सिंह ने कहा, “जब दिल्ली पुलिस छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही थी, उस समय कई छात्र हाथ जोड़कर अपनी बात कह रहे थे और पुलिस से अपील कर रहे थे। इसके बावजूद उन पर लगातार लाठियां बरसाई गईं। इस कार्रवाई से पूरे देश में दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की आलोचना हो रही है।”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार को दमनात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
इस बीच संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे, कथित पेपर लीक और हालिया घटनाओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी सांसदों ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग की।
उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पेपर लीक करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी। सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को केवल दोषियों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम भी उठाने चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल छात्रों का मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।







