गुरुग्राम: मेदांता अस्पताल से सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र, संसद में पेपर लीक पर चर्चा और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग
गुरुग्राम, 22 जुलाई। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया है। पत्र में उन्होंने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने, प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों को रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।
पत्र के अनुसार, सोनम वांगचुक ने लिखा है कि देशभर के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों ने युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए सरकार को इस विषय पर संसद में व्यापक चर्चा कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए। पत्र में कहा गया है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जानने और बातचीत करने के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि दोनों मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और संबंधित मुद्दों पर सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई, कई छात्रों को हिरासत में लिया गया और उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने मांग की कि सरकार इन मामलों की समीक्षा कर उचित निर्णय ले।
पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और सकारात्मक आश्वासन देती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। वहीं यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
गौरतलब है कि पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, आंदोलन से जुड़े कुछ छात्र संगठनों और प्रतिनिधियों द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सार्वजनिक रूप से लगातार उठाई जा रही है।
इस बीच मेदांता अस्पताल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। अस्पताल परिसर और आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है तथा आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, देर रात तक केंद्र सरकार के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं या मंत्रियों के भी सोनम वांगचुक से मुलाकात के लिए अस्पताल पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सोनम वांगचुक के पत्र के सार्वजनिक होने के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेती है और आगे बातचीत तथा आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।







