संवाददाता -: जसपाल राणा
देहरादून 9 अक्टूबर- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून व्यवस्था दोनों को शर्मसार करने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। वह जगह जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता है, जहाँ लोग अपनी जान बचाने के लिए आते हैं, उसी दून अस्पताल की इमरजेंसी को कुछ असामाजिक तत्वों ने जंग का मैदान बना दिया। बाहर से लड़कर आए लोगों ने न सिर्फ अस्पताल के अंदर घुसकर हंगामा किया, बल्कि इमरजेंसी वार्ड के अंदर ही धारदार हथियार लहराए। इस घटना के बाद दून अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और वहाँ मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों में दहशत का माहौल है। यह घटना केवल एक झगड़े की घटना नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।

क्या है पूरा मामला – ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना बीती रात/आज सुबह की है। बताया जा रहा है कि देहरादून के किसी इलाके में दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। इस मारपीट में कुछ लोगों को चोटें आईं। चोटिल लोगों को उपचार के लिए दून अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। आरोप है कि जिन लोगों के बीच बाहर झगड़ा हुआ था, वे अपने साथियों के साथ हथियार लेकर अस्पताल पहुँच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 8 से 10 युवक हाथों में चाकू जैसे धारदार हथियार लेकर इमरजेंसी वार्ड में घुस गए। उन्होंने इमरजेंसी के अंदर ही एक-दूसरे को धमकाना शुरू कर दिया, गाली-गलौज की और हथियार लहराए। उस वक्त इमरजेंसी में कई गंभीर मरीज भर्ती थे, कई मरीजों का उपचार चल रहा था, महिलाएं और बच्चे भी वहाँ मौजूद थे। अचानक हथियारों के साथ युवकों के घुसने से पूरे इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों का कहना है कि करीब 15 से 20 मिनट तक इमरजेंसी वार्ड में हंगामा चलता रहा। इस दौरान डॉक्टर और स्टाफ खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। किसी तरह अस्पताल के सुरक्षा गार्डों और वहाँ मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया।
डॉक्टरों में भारी आक्रोश, काम बंद करने की चेतावनी
इस घटना के बाद दून अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों और इमरजेंसी में तैनात स्टाफ में भारी गुस्सा है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, वे कैसे मरीजों की जान बचाएंगे। डॉ. ने बताया कि हम यहाँ 24 घंटे जान बचाने के लिए खड़े रहते हैं। अगर इमरजेंसी के अंदर ही कोई चाकू लेकर घुस जाएगा तो हम क्या करेंगे? हमारे पास कोई सुरक्षा नहीं है। पुलिस चौकी अस्पताल परिसर में है, लेकिन इमरजेंसी के अंदर जब घटना होती है तो कोई पुलिस वाला नहीं होता। आज तो भगवान का शुक्र है कि किसी डॉक्टर या मरीज को चोट नहीं लगी, वरना कुछ भी हो सकता था। डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि इमरजेंसी वार्ड के गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाए जाएं, हर शिफ्ट में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए और अस्पताल में हंगामा करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो उन्हें कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाने पड़ेंगे।
अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था फेल – बड़े सवाल
यह घटना दून अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
1. इमरजेंसी में कैसे घुसे हथियार: अस्पताल की इमरजेंसी में धारदार हथियार कैसे पहुँच गए? क्या गेट पर कोई चेकिंग नहीं होती?
2. सुरक्षा गार्ड नाकाफी: अस्पताल में जो प्राइवेट सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, क्या वे इस तरह की घटनाओं को रोकने में सक्षम हैं? प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गार्ड केवल मूकदर्शक बने रहे। 3. पुलिस चौकी का क्या फायदा: दून अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी है, लेकिन जब इमरजेंसी में 20 मिनट तक हंगामा होता रहा, तब पुलिस कहाँ थी? पुलिस के पहुँचने में इतनी देरी क्यों हुई? 4. मरीजों की सुरक्षा कौन करेगा: अगर इमरजेंसी के अंदर ही गुंडागर्दी होगी तो गंभीर मरीज कहाँ जाएंगे? उस वक्त वहाँ भर्ती मरीजों की जान को भी खतरा था।
आम जनता में भी दहशत

इस घटना के बाद आम जनता में भी डर का माहौल है। तीमारदारों का कहना है कि वे अपने मरीज को लेकर अस्पताल आते हैं, लेकिन यहाँ तो खुद उन्हें डर लगने लगा है। एक तीमारदार ने बताया, “मैं अपनी माँ को लेकर इमरजेंसी में था, अचानक 10 लड़के चाकू लेकर आ गए और गाली देने लगे। मेरी माँ तो डर के मारे कांपने लगी। अगर किसी को चाकू लग जाता तो कौन जिम्मेदार होता पुलिस प्रशासन मौन, एसएसपी से कार्रवाई की मांग इस पूरी घटना के बाद अभी तक पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सवाल ये है कि क्या पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज करेगी? क्या सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हथियार लहराने वाले युवकों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा? दून अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की रिपोर्ट पुलिस को दी है। अब देखना होगा कि देहरादून पुलिस इस पर कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।
उत्तराखंड में डॉक्टरों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा
आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दून अस्पताल और उत्तराखंड के अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। कुछ महीने पहले भी एक मरीज की मौत के बाद तीमारदारों ने डॉक्टर के साथ मारपीट की थी। हर बार डॉक्टर हड़ताल करते हैं, प्रशासन आश्वासन देता है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था जस की तस बनी रहती है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद पूरे देश में डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठा था, लेकिन लगता है देहरादून का सिस्टम अभी भी नहीं जागा है।








