21 मार्च 2026
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा हुआ है और इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होता जा रहा है। एक तरफ ईद का पावन त्योहार है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतियों ने माहौल को और गरमा दिया है।
कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज़ में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हुईं और उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि वोट देने का अधिकार किसी भी कीमत पर छीना नहीं जाने दिया जाएगा और उनकी पार्टी लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी, जो भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को चुनौती दे रहे हैं, उन्होंने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना कर चुनावी संदेश दिया। दोनों नेताओं की यह गतिविधियां दिखाती हैं कि चुनावी माहौल अब धर्म और आस्था के रंग में भी रंगता जा रहा है।इस बीच, चुनाव आयोग ने राज्य में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं। कुल 2400 कंपनियों की तैनाती की जा रही है, जिसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस शामिल हैं। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।
पिछले चुनावों में हुई हिंसा को देखते हुए इस बार आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। EVM और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल तैनात रहेंगे, साथ ही चुनाव के बाद संभावित हिंसा रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। राजनीतिक दलों की रणनीतियां भी अब साफ नजर आने लगी हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट पर खास फोकस किया है। यहां मुकाबला दिलचस्प इसलिए है क्योंकि सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ टीएमसी ने पबित्र कर को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले उनके करीबी माने जाते थे।
नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 में ममता बनर्जी को करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। इस बार सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। इसके अलावा, इंडियन सेक्युलर फ्रंट ने भी 33 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्टी इस बार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को चुनौती दे रही है। वहीं, ममता बनर्जी ने ‘दुआरे चिकित्सा’ योजना की घोषणा कर जनता को लुभाने की कोशिश की है, जबकि दूसरी ओर भाजपा भी अपनी रणनीति और प्रचार के जरिए मतदाताओं को साधने में जुटी है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि विचारधारा, रणनीति और जनसंपर्क की बड़ी लड़ाई बन चुका है। ईद के मौके पर जहां एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया, वहीं चुनावी टकराव भी तेज होता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला और भी निर्णायक और दिलचस्प होने वाला है, जिस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।







