गुरुग्राम/ चंडीगढ़, 21 मार्च।
गुरुग्राम में राजस्व विभाग की हालिया कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। 12 मार्च को जारी आदेश के तहत बादशाहपुर के नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह के खिलाफ नियम 7 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया था। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी थी।
इसके साथ ही गुरुग्राम की तीन तहसीलों में कार्यरत तीन रजिस्ट्री क्लर्कों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश भी जारी किए गए थे। निलंबित कर्मचारियों में अमित राघव (तहसील वजीराबाद), अमिता (तहसील कादीपुर) और आरती (तहसील बादशाहपुर) शामिल हैं। इन पर अनियमितताओं और कथित गलत कार्यों के आरोप लगे थे।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद जो स्थिति सामने आ रही है, वह विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को निलंबित किया गया था, वे अब भी नियमित रूप से तहसील कार्यालयों में देखे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी न केवल कार्यालय में उपस्थित रहते हैं, बल्कि अपने खिलाफ चल रही जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी कर रहे हैं।
इस स्थिति ने निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर दिया है। यदि निलंबित कर्मचारी ही दफ्तर में सक्रिय रहेंगे, तो जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाएगी, यह बड़ा सवाल है।
वहीं, संबंधित अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह धारणा बन रही है कि या तो आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है और क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो पाती है या नहीं।







