केरल, 27 मार्च|
विधानसभा चुनाव से पहले केरल की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सत्ताधारी सीपीआई(एम) और विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब खुली सियासी जंग में बदलता नजर आ रहा है।
ताजा विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल के बयान से हुई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर गंभीर आरोप लगाए। वेणुगोपाल ने कहा कि विजयन, राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव से घबराए हुए हैं और इसी वजह से वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केरल की जनता राहुल गांधी से प्रभावित है, और यही कारण है कि मुख्यमंत्री लगातार उन पर निशाना साध रहे हैं। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन केंद्र सरकार के साथ समझौतों के कारण मोदी के खिलाफ चुप्पी बनाए हुए हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इन आरोपों पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ऐतिहासिक रूप से बीजेपी की “बी-टीम” की तरह काम करती रही है। विजयन का कहना है कि कांग्रेस की नीतियों ने कई राज्यों में बीजेपी को फायदा पहुंचाया है।
इस बीच, विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने भी मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए सीपीआई(एम) और आरएसएस के बीच संबंध होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अतीत में सीपीआई(एम) को आरएसएस और बीजेपी का समर्थन मिला है, और कुछ मामलों में “बैकचैनल” संपर्क भी रहे हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री विजयन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस नेताओं के पुराने संबंधों पर सवाल उठाए और आरएसएस से जुड़े मामलों का जिक्र किया।
इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का बयान भी अहम रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में सीपीआई(एम) और बीजेपी के बीच “मौन साठगांठ” है, क्योंकि मुख्यमंत्री के खिलाफ मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
इन सभी आरोपों और पलटवारों के बीच केरल की राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है। एक ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ है, तो दूसरी ओर सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला एलडीएफ। दोनों ही गठबंधन चुनाव से पहले अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
राजनीतिक बयानबाजी अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच चुकी है, जिससे साफ है कि आने वाले चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाले होने वाले हैं







