पश्चिम बंगाल,04 अप्रैल।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर सीट से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर अपने चुनाव प्रचार के दौरान हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना ने राज्य में चुनावी तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार सुबह अधीर रंजन चौधरी अपने समर्थकों के साथ बहरामपुर के वार्ड नंबर 19 में चुनाव प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान टीएमसी के पार्षद भीष्मदेव कर्माकर और उनके कुछ समर्थक मौके पर पहुंचे। कांग्रेस का आरोप है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने न केवल प्रचार में बाधा डाली, बल्कि चौधरी के काफिले और समर्थकों पर हमला भी किया। देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल गया और कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचा। घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
आरोप-प्रत्यारोप तेज
अधीर रंजन चौधरी ने इस घटना को सुनियोजित हमला बताते हुए कहा कि यह विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। वहीं, बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता का भरोसा खो रही है और सहानुभूति वोट हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, टीएमसी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चुनावी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इसी बीच, टीएमसी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि उनकी शुभेंदु अधिकारी के साथ कथित नजदीकी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
अन्य राज्यों में भी बढ़ी चिंता
यह घटना अकेली नहीं है। केरल के मल्लपुरम में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले पर भी हमला हुआ, जिसमें उनके गनमैन और ड्राइवर को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं से साफ है कि चुनावी माहौल में राजनीतिक टकराव और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद झड़पों का सिलसिला जारी है, जिससे मतदान और प्रचार प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी पर कथित हमला और केरल में शशि थरूर के काफिले पर हमले की घटनाएं राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक तनाव को और तेज कर रही हैं। चुनाव आयोग इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई कर सकता है। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी एक अहम मुद्दा बनी रहेगी।







