हरियाणा में रबी खरीद पर सियासी घमासान
कांग्रस नेता सुरजेवाला के बयान पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शंकर धूपड़ का पलटवार
बिचौलियों के दर्द पर राजनीति कर रही कांग्रेस, किसान की नहीं कोई परवाह : शंकर धूपड़
भिवानी, 04 अप्रैल ।
हरियाणा में रबी सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही फसलों की खरीद पर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। एक ओर जहां हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए सुविधाओं का पिटारा खोलते हुए एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद का दावा किया है, वही राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसे किसानों के खिलाफ गहरा षड्यंत्र करार दिया है। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य और प्रदेश प्रवक्ता शंकर धूपड़ ने सुरजेवाला के बयानों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। सुरजेवाला के आरोपों पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शंकर धूपड़ ने कड़ा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से बिचौलियों की राजनीति करती आई है और उसे सीधा किसान के खाते में पैसा जाना हजम नहीं हो रहा।
धूपड़ ने कहा कि सुरजेवाला जिसे तुगलकी फरमान कह रहे हैं, वह दरअसल पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया क्रांतिकारी कदम है। बायोमेट्रिक सत्यापन से कागजी किसानों और बिचौलियों का खेल खत्म हो गया है। बायोमेट्रिक नॉमिनेशन की सुविधा से अब किसान को धूप में मंडी में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, उसके प्रतिनिधि भी काम कर सकते हैं। क्या सुरजेवाला चाहते हैं कि किसान लाइनों में लगा रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में रणदीप सूरजेवाला को भाव नहीं दे रहा तथा इस प्रकार की ब्यानबाजी के माध्यम से सुरजेवाला अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास कर रहे है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 72 लाख टन गेहूं और 3.73 लाख टन सरसों की खरीद का लक्ष्य रखा है। 2 हजार 312 करोड़ की सरसों और चने की खरीद का रोडमैप तैयार है और पैसा सीधे किसान के खाते में जा रहा है। शंकर धूपड़ ने कहा कि हरियाणा सरकार ने इस सीजन को सुचारू बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसे भाजपा किसान हितैषी मॉडल के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हरियाणा में रबी 2026 सीजन के लिए 3.73 लाख मीट्रिक टन से अधिक चना और सरसों की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2 हजार 312 करोड़ रुपये है। गेहूं की खरीद के लिए 72 लाख टन का लक्ष्य रखा गया है। वही किसानों की सुविधा के लिए पूरे प्रदेश में गेहूं की खरीद के लिए 416 और सरसों के लिए 112 केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा जौ, चना और मसूर के लिए भी अलग से केंद्र स्थापित किए गए हैं।
शंकर धूपड़ ने स्पष्ट किया कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल और उर्वरक वितरण को उससे जोडऩे से खाद की कालाबाजारी रुकी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसानों को बरगलाने की कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि आज हरियाणा का किसान डिस्ट्रेस सेल (मजबूरी में फसल बेचना) से मुक्त हो चुका है। मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी और एमएसपी के अंतर को सीधे खाते में भेजने (भावांतर) जैसे कदमों ने कांग्रेस के कार्यकाल के दो-दो रुपये के चेक’ वाले राज को खत्म कर दिया है।







