- एक कर्मचारी का सिर फूटा, एक के हाथ पर व एक के मुंह पर चोटें आई
- पुलिस के खिलाफ कर्मचारियों में आक्रोष
गुरुग्राम, 10 अप्रैल।
मानेसर में धारा 163 लागू होने के बावजूद वीरवार को हजारों की संख्या में हड़ताली कर्मचारी जुट गए। जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस लाठीचार्ज किया। जिससे मामला भगदड़ की स्थिति बन गई।
इस दौरान 20 से ज्यादा कर्मचारियों को चोटें आई हैं। एक के सिर पर गहरा जख्म है। काफी खून बहने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक महिला बेहोश हो गई। इससे भड़के हड़तालियों ने पुलिस की एक बाइक फूंक दी और गाड़ी पर पथराव किया, जिससे फ्रंट और बैक के शीशे टूट गए।
एक पुलिसकर्मी से महिलाओं ने लाठी भी छीनने की कोशिश की गई। इस पर पुलिस कर्मियों की महिलाओं से नोकझाेंक और खींचतान भी हुई। कई घंटे तक झड़प चलती रही। एक पुलिस कर्म इस विवाद के बाद कई कंपनियों के बाहर सैलरी बढ़ाने संबंधी सरकार के ऑर्डर वाले नोटिस चिपका दिए गए।
कुछ दिन पहले होंडा कंपनी में सैलरी बढ़ाने को लेकर स्ट्राइक हुई थी। इसके बाद 3 दिन से आधा दर्जन से अधिक बड़ी कंपनियों तक इसकीआंच पहुंच गई। हालांकि होंडा कंपनी के समझौते के बाद काम पर लौट गए। सत्यम, मुंजाल शोवा, रिको और अन्य कंपनियों के कर्मचारी 3 दिन से काम पर लौटने को तैयार नहीं हुुए।
पुलिस प्रशासन ने कहा कि यहां धारा 163 लागू करते हुए धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। मगर, प्रदर्शनकारी नहीं माने। कर्मी नेताओं का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स लंबे समय से शोषण का शिकार हैं। न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, सुरक्षा और स्थायीकरण जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं।
पुलिस से नोकझोंक, फिर लाठीचार्ज
पुलिस ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया तो नोकझोंक हुई। धक्का-मुक्की कर पुलिसकर्मियों का मोबाइल छीनने का प्रयास किया गया। कर्मचारियों का कहना था कि यह उनकी हक की लड़ाई है, जो प्रबंधन और उनके बीच का मामला है। पुलिस को बीच में नहीं आना चाहिए और न ही प्रबंधन की तरफदारी करनी चाहिए।
उधर, डीसी अजय कुमार ने बीती शाम बयान जारी किया। कहा कि सरकार की तरफ से न्यूनतम वेतन (मिनिमम वेजेज) की दरों में वृद्धि की गई है। यह एक अप्रैल से लागू मानी जाएगी। बताया कि अकुशल श्रमिकों का वेतन 11275 से बढ़ कर 15220, अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12430 से बढ़ कर 16780 रुपए और कुशल श्रमिकों का वेतन 13704 से बढ़ कर 18500 रुपए किया गया है। उच्च कुशल का वेतन 14389 से बढ़ कर 19425 रुपए हो जाएगा। यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत है।
आईएमटी मानेसर में अपनी मांगों को लेकर एक दिन पहले हड़ताल पर गए ठेके के कर्मचारियों पर दूसरे दिन पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। कर्मचारी कंपनी गेट पर हड़ताल के लिए एकत्रित हुए थे। इसी बीच पुलिस ने धारा 163 लगे होने पर उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठियां मारीं। इसमें कई कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना में एक कर्मचारी का सिर फूट गया तो किसी के हाथ व मुंह पर गहरी चोटें आई।
गुरुवार की सुबह जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो रहे थे तो पुलिस ने उन्हें वहां से खदेडऩा चाहा। विवाद बढ़ गया और पुलिस ने कर्मचारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। कर्मचारी बचाव के लिए इधर-उधर भागने लगे। पुलिस की लाठी से एक कर्मचारी की सिर फूट गया। इससे कर्मचारियों में आक्रोष पैदा हो गया। कर्मचारी अब तक तो कंपनी प्रबंधन के खिलाफ ही थे, अब वे पुलिस के भी खिलाफ हो गए हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली से उनमें रोष है। पुलिस की इस कार्रवाई से कर्मचारियों का विरोध और अधिक बढ़ गया। कर्मचारियों ने ऐलान किया कि अपनी मांगों के पूरा हुए बिना वे काम पर नहीं लौटेंगेें। कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए डीसी की ओर से मानेसर में धारा 163 भी लगाई गई है।
बता दें कि आईएमटी मानेसर में 10 कंपनियों के करीब तीन हजार कर्मचारी बुधवार से हड़ताल पर हैं। गारमेंट एवं ऑटोमोबाइल कंपनियों के इन कर्मचारियों की कई मांगें हैं। ठेके के कर्मचारियों का कंपनियां लंबे समय से शोषण कर रही हैं। न्यूनतम मजदूरी, ओवर टाइम भुगतान, सुरक्षा और स्थायीकरण जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं। कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। कर्मचारी चाहते हैं कि उनका न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये हो। हालांकि प्रदेश सरकार ने बुधवार को ही कैबिनेट की बैठक में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 15,220 रुपये मासिक करने का निर्णय लिया है। अभी तक वेतन 11274 रुपये है। कुछ कर्मचारी इस वेतन बढ़ोतरी पर हड़ताल खत्म करके चले गए थे, लेकिन कुछ कर्मचारियों को इस वेतन बढ़ोतरी से संतुष्टि नहीं हुई। इसलिए वे हड़ताल पर ही डटे रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विवाद तब बड़ा जब पुलिस ने हार्टली कर्मचारियों को सेक्टर 4 के मॉडलमैन कंपनी के बाहर धरना देने वाली महिला कर्मचारियों को बाहर हटाने की कोशिश की उनमें आपस में खींचातानी हुई फिर पथराव हुआ और पुलिस की दो गाड़ियों को पत्थर लगने से शीशे टूट गए और बाद में उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया गया सड़क पर कूड़े में भी आग लगा दी गई बाद में पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया जिसमें कई श्रमिक घायल हो गए हैं समाचार भेजने तक तनाव बना हुआ है प्रशासन बातचीत की भी कोशिश कर रहा है और बल प्रयोग के लिए भी तैयारी कर रहा है यह घटना जैसे ही अन्य कंपनियों में पहुंची वहां भी हड़ताल शुरू हो गई और श्रमिक इकट्ठे होने शुरू हो गए हैं.
कच्चे कर्मचारी की तनख्वाह बढ़ोतरी को लेकर कल पूरे मानेसर में 10000 से अधिक श्रमिकों ने हड़ताल रखी थी जो लगभग शांतिपूर्वक संपन्न हो गई क्योंकि चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री ने उनकी वेतन वृद्धि की घोषणा कर दी थी शाम को अधिकारियों ने कहा कि मामला शांत हो गया है लेकिन आज सुबह फिर टकराव शुरू हो गया है हालांकि यह सामूहिक विवाद नहीं था मॉडल मैन कंपनी के बाहर बैठे श्रमिकों के साथ यह विवाद शुरू हुआ और अब धीरे-धीरे अन्य कंपनियों में फैल रहा है।
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर हरियाणा के प्रधान कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से गुड़गांव की विभिन्न फैक्ट्रियों के श्रमिक अपनी मासिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है। मजदूरों की इस जायज़ आवाज को सरकारी तंत्र और निजी ताकतों के बल पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा 8 अप्रैल 2026 को न्यूनतम वेतन बढ़ाने की जो घोषणा की गई है, वह मजदूरों के साथ एक और धोखा है। न्यूनतम वेतन का निर्धारण त्रिपक्षीय प्रणाली के तहत होना चाहिए, जिसमें सरकार, प्रबंधन और श्रमिक पक्ष की सहमति शामिल होती है। इसके लिए तय मानदंडों में एक परिवार की तीन इकाइयों के लिए प्रतिदिन प्रति इकाई कम से कम 2700 कैलोरी युक्त खाद्य सामग्री की लागत, उस पर 35% ईंधन व मकान किराया, तथा 25% शिक्षा व अन्य सामाजिक आवश्यकताओं का खर्च शामिल किया जाता है।
कॉमरेड राजेंद्र सिंह ने कहा कि इन सर्वमान्य मानदंडों के अनुसार आज हरियाणा के मजदूरों का न्यूनतम वेतन कम से कम ₹30,000 प्रतिमाह बनता है। इसके विपरीत, राज्य सरकार द्वारा ₹15,220 मासिक न्यूनतम वेतन घोषित करना पूरी तरह से मनमाना, अन्यायपूर्ण और मजदूर विरोधी कदम है। यह फैसला मजदूरों के साथ घोर अन्याय है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष से हरियाणा सरकार का श्रम विभाग न्यूनतम वेतन संशोधन का केवल दिखावा करता रहा है, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से वेतन में कोई सार्थक वृद्धि नहीं की गई। अब गुड़गांव के चल रहे मजदूर आंदोलन को दबाने के लिए यह नाममात्र की बढ़ोतरी घोषित की गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार मजदूर विरोधी नीतियों पर काम कर रही है।
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर हरियाणा प्रदेश कमेटी ने गुड़गांव सहित पूरे प्रदेश के मजदूरों से आह्वान किया है कि ₹30,000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन उनका अधिकार है और इस मांग को हासिल करने के लिए आंदोलन को जारी रखा जाए।







