9 अप्रैल 2026।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान और इजरायल के बीच जुबानी जंग तेज होती नजर आ रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं।
क्या है पूरा मामला?
ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इजरायल को लेकर बेहद तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी की।
उन्होंने इजरायल को “मानवता के लिए अभिशाप” और “कैंसर जैसा राज्य” बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि इस राज्य को बनाने वाले “नरक में जलें”।
उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा।
इजरायल का कड़ा पलटवार
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को “अत्यंत आपत्तिजनक” और “अस्वीकार्य” करार दिया।
नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि
“किसी भी सरकार से इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जा सकती, खासकर उस देश से जो खुद को शांति का मध्यस्थ बताता हो।”
विदेश मंत्री की भी सख्त प्रतिक्रिया
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई।
उन्होंने इस बयान को “यहूदी-विरोधी” बताते हुए कहा कि इजरायल को “कैंसर” कहना उसके विनाश की खुली अपील के बराबर है।
मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनाव चरम पर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात पहले से ही बेहद नाजुक बने हुए हैं।
गाजा, ईरान और लेबनान में जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर चुनौती दी है।
ख्वाजा आसिफ ने अपने पोस्ट में लेबनान में इजरायली कार्रवाई को “नरसंहार” बताया था और निर्दोष नागरिकों की मौत का आरोप लगाया था।
विवाद बढ़ते ही डिलीट किया पोस्ट
जैसे ही यह बयान वायरल हुआ और आलोचना बढ़ने लगी, ख्वाजा आसिफ ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
मध्यस्थता की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
दरअसल, पाकिस्तान इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन इस विवाद के बाद उसकी “निष्पक्ष मध्यस्थ” की छवि पर सवाल उठने लगे हैं।
इजरायल ने भी साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान को भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानता।
बिना कूटनीतिक संबंध के भी बढ़ा तनाव
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं।
इसके बावजूद इस तरह की सीधी बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
लेबनान में हमलों से और बिगड़ी स्थिति
दूसरी ओर, लेबनान में हालिया इजरायली हमलों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबर है।
इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर की गई थी,
जबकि कई देश इसे सीजफायर के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।
अब आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या यह विवाद अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को प्रभावित करेगा?
- क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका कमजोर पड़ जाएगी?
फिलहाल, यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है।
एक तरफ बढ़ती बयानबाजी और दूसरी तरफ जमीनी संघर्ष—इन दोनों के बीच शांति की राह और मुश्किल होती नजर आ रही है।







