सरकार ध्यान दे…बुजुर्गों के लिए बेमानी हो गई है सिल्वर इकोनॉमी स्कीम: अशोक बुवानीवाला
-सिल्वर इकोनॉमी स्कीम में बुजुर्गों की चुनौतियों पर बने ठोस नीति
-कांग्रेस उद्योग सैल के चेयरमैन अशोक बुवानीवाला ने कही यह बात
-2050 तक 20 प्रतिशत से ज्यादा होगी बुजुर्ग आबादी
-स्वास्थ्य, पेंशन, रोजगार और डिजिटल साक्षरता पर फोकस करे केंद्र
गुरुग्राम, 3 जुलाई॥ काँग्रेस उद्योग सैल के चेयरमैन अशोक बुवानीवाला ने केंद्र सरकार पर सिल्वर इकोनॉमी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश में वरिष्ठ नागरिकों की तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए सिल्वर इकोनॉमी आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेगी, लेकिन सरकार इस क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है।

ऐसी नीतियां लागू करनी होंगी जो बुजुर्गों को बोझ नहीं
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों को कितना सम्मान और सुरक्षा देता है। यदि केंद्र सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना देखती है तो उसे सिल्वर इकोनॉमी को प्राथमिकता देनी होगी। ऐसी नीतियां लागू करनी होंगी जो बुजुर्गों को बोझ नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक शक्ति के रूप में स्थापित करें।
कोई दूरदर्शी नीति नहीं बनाई।
बुवानीवाला ने कहा कि सरकार की ओर से योजनाओं का प्रचार तो जोर-शोर से हो रहा है, मगर जमीनी स्तर पर बुजुर्ग आज भी स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। बुवानीवाला ने जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2011 में देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 10.38 करोड़ थी। 2031 तक यह बढक़र लगभग 19.34 करोड़ और 2050 तक कुल आबादी के 20 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में कोई दूरदर्शी नीति नहीं बनाई। नतीजा यह है कि बुजुर्गों को इलाज, देखभाल और आर्थिक सहायता के लिए आज भी अपने परिवारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
देश में पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि देश में अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों के पास पर्याप्त पेंशन या बचत नहीं है। असंगठित क्षेत्र में जीवनभर काम करने वाले करोड़ों लोग वृद्धावस्था में गंभीर आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला भारी खर्च उनकी बची-खुची पूंजी भी खत्म कर देता है। सरकार बुजुर्गों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा और किफायती इलाज की व्यवस्था करने में भी नाकाम रही है। बड़े अस्पतालों में जेरियाट्रिक वार्ड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
डिजिटल इंडिया से कटे हैं देश के बुजुर्ग
अशोक बुवानीवाला ने डिजिटल इंडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार यह भूल गई है कि बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक अभी भी डिजिटल तकनीक से दूर हैं। डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण वे टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन बैंकिंग, डीबीटी, पेंशन ट्रैकिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और खराब है। दूसरी ओर संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने और युवाओं के पलायन के कारण बुजुर्गों में अकेलापन और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। सरकार के पास इस सामाजिक चुनौती से निपटने की कोई प्रभावी रणनीति नहीं है।
रोजगार का बड़ा अवसर है सिल्वर इकोनॉमी
अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सिल्वर इकोनॉमी केवल बुजुर्गों के कल्याण का विषय नहीं है। यह स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष, मेडिकल उपकरण, होम केयर, इंश्योरेंस, वेलनेस, टूरिज्म और तकनीकी क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार का बड़ा अवसर भी है। अगर सरकार सही नीति बनाए तो इस सेक्टर से लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं और जीडीपी को नई गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान और यूरोप के कई देशों ने सिल्वर इकोनॉमी को अपनी ग्रोथ का इंजन बनाया है। कांग्रेस नेता अशोक बुवानीवाला ने सरकार से मांग की है कि कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का विस्तार हो। हर जिले में समर्पित जेरियाट्रिक स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू की जाएं। अटल पेंशन योजना और एनएसएपी का दायरा बढ़ाकर असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को कवर किया जाए। न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाई जाए। अनुभव और क्षमता के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए पार्ट-टाइम नौकरी, कंसल्टेंसी और स्वरोजगार के अवसर तैयार किए जाएं। पंचायत स्तर पर बुजुर्गों के लिए डिजिटल ट्रेनिंग कैंप लगाए जाएं। बैंकों और पोस्ट ऑफिस में सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क बनें। उम्र-अनुकूल आवास, सीनियर सिटीजन पार्क, लो-फ्लोर बसें और सार्वजनिक जगहों पर रैंप-रेलिंग अनिवार्य किए जाएं। साथ ही होम केयर, हेल्थ टेक और आयुष आधारित सेवाओं के लिए स्टार्टअप्स को टैक्स छूट और फंडिंग दी जाए।







