गुरुग्राम में जिला प्रशासन का रात्रि प्रवास बना खानापूर्ति?

गुरुग्राम में रात्रि प्रवास पर सवाल, 4-5 महीने से DC स्तर पर कार्यक्रम नहीं होने का दावा

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गुरुग्राम में जिला प्रशासन का रात्रि प्रवास बना खानापूर्ति? ग्रामीणों ने उठाए सवाल

पिछले चार-पांच महीनों से उपायुक्त स्तर पर रात्रि प्रवास नहीं

गुरुग्राम, 9 सितंबर। हरियाणा सरकार की ओर से गांवों में प्रशासन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने के उद्देश्य से शुरू किए गए रात्रि प्रवास कार्यक्रम को लेकर गुरुग्राम जिले में सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि जिले में पिछले चार-पांच महीनों से उपायुक्त की अध्यक्षता में रात्रि प्रवास कार्यक्रम नियमित रूप से नहीं हो पा रहे हैं और कई जगहों पर केवल अधिकारियों को भेजकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को गांवों तक पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। रात्रि प्रवास के दौरान अधिकारी गांव में रुककर ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हैं, स्थानीय समस्याओं की जानकारी लेते हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के निर्देश देते हैं। हरियाणा के दूसरे जिलों में हाल के महीनों में ऐसे कार्यक्रमों में उपायुक्तों ने स्वयं ग्रामीणों की शिकायतें सुनी हैं। उदाहरण के तौर पर पलवल में मार्च 2026 में उपायुक्त ने रात्रि ठहराव जनसंवाद में ग्रामीणों की 65 समस्याएं सुनीं, जिनमें से करीब 40 का मौके पर समाधान कराया गया।

गुरुग्राम में डीसी स्तर पर रात्रि प्रवास को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों का दावा है कि गुरुग्राम जैसे महत्वपूर्ण जिले में पिछले करीब चार-पांच महीनों से उपायुक्त स्तर पर गांवों में रात्रि प्रवास नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर एसडीएम अथवा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम किए जा रहे हैं, लेकिन जिला उपायुक्त की प्रत्यक्ष भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है।

हालांकि, हाल ही में गुरुग्राम के चंदू गांव में मानेसर एसडीएम लोकेश यादव द्वारा रात्रि प्रवास किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की, गांव की मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों से संबंधित समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।

यही वजह है कि अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या रात्रि प्रवास कार्यक्रम केवल अधीनस्थ अधिकारियों तक सीमित रह गया है या फिर इसका उद्देश्य जिला स्तर पर भी उसी गंभीरता से लागू किया जा रहा है, जैसा सरकार की मंशा बताई जाती है।

सरकार की मंशा क्या है?

रात्रि प्रवास का मूल उद्देश्य प्रशासन को ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंचाना है। अधिकारी गांव में रुकते हैं और ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हैं। इससे प्रशासन को गांव की जमीनी स्थिति समझने का अवसर मिलता है और ग्रामीण भी बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के अपनी समस्याएं वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकते हैं।

हरियाणा के झज्जर जिले में अगस्त के अंत में हुए रात्रि ठहराव कार्यक्रम में डीसी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और सड़क, जल निकासी, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पशुपालन से जुड़ी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों को समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए गए।

ऐसे कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी के कारण कई शिकायतों का मौके पर समाधान संभव होता है और जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं होता, उन्हें समयबद्ध कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंपा जाता है।

ग्रामीणों को वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संवाद की उम्मीद

गुरुग्राम जिले के ग्रामीणों का कहना है कि रात्रि प्रवास तभी प्रभावी होगा जब वरिष्ठ अधिकारी गांव में पर्याप्त समय दें और ग्रामीणों से सीधे बातचीत करें। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, सीवर, बिजली, जल निकासी, सरकारी जमीन, पेंशन, परिवार पहचान पत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी अनेक समस्याएं होती हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि जब जिला स्तर के अधिकारी स्वयं गांव में पहुंचते हैं तो छोटी समस्याओं के साथ-साथ ऐसी समस्याएं भी सामने आती हैं जो नियमित प्रशासनिक बैठकों में अक्सर सामने नहीं आ पातीं।

पहले डीसी स्तर पर सक्रियता का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुग्राम में पहले तैनात रहे उपायुक्तों द्वारा गांवों में रात्रि प्रवास के दौरान ग्रामीणों से सीधा संवाद किया जाता था। अधिकारी गांव में रुकते थे, चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते थे और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही दिशा-निर्देश देते थे।

ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवस्था से उन्हें यह भरोसा मिलता था कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रहा है। अब उनकी मांग है कि इस व्यवस्था को दोबारा उसी प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे कार्यक्रम

रात्रि प्रवास कार्यक्रम का उद्देश्य केवल गांव में जाकर बैठक आयोजित करना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करना है।

गुरुग्राम से जुड़ी हालिया रिपोर्ट में भी रात्रि प्रवास के दौरान एसडीएम स्तर के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्यालयों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है। अधिकारियों को यह भी कहा गया कि ग्रामीणों की शिकायतों पर केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि प्रत्येक मामले में समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

इसी आधार पर ग्रामीणों का कहना है कि रात्रि प्रवास के बाद सामने आने वाली समस्याओं की मॉनिटरिंग भी जरूरी है। केवल शिकायत सुनने के बजाय यह देखना भी जरूरी है कि संबंधित विभाग ने उस पर क्या कार्रवाई की और समस्या वास्तव में हल हुई या नहीं।

गुरुग्राम जैसे जिले में बढ़ जाती है जिम्मेदारी

गुरुग्राम दिल्ली-एनसीआर का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहा जिला है। यहां शहरी क्षेत्रों के साथ बड़ी संख्या में गांव भी हैं। शहरीकरण के बढ़ते दबाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमीन, सड़क, जल निकासी, बिजली, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आती रहती हैं।

ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी मौजूदगी प्रशासन और जनता के बीच भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सरकार के वादे और जमीनी क्रियान्वयन पर नजर

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने गांवों में जाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान की व्यवस्था को महत्व दिया है। इसलिए गुरुग्राम जिले में भी रात्रि प्रवास कार्यक्रम नियमित और प्रभावी तरीके से होने चाहिए।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रत्येक रात्रि प्रवास के बाद प्राप्त शिकायतों की सूची तैयार की जाए, संबंधित विभाग को जिम्मेदारी दी जाए और निर्धारित समय के भीतर समाधान की समीक्षा की जाए। इससे कार्यक्रम महज एक प्रशासनिक गतिविधि न रहकर वास्तविक जनसमस्या समाधान का माध्यम बन सकेगा।

अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर

गुरुग्राम में रात्रि प्रवास को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच अब निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में गांवों में नियमित रात्रि प्रवास दोबारा शुरू होता है और शिकायतों के समाधान की निगरानी की जाती है, तो इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हो सकता है।

 

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Author: New India News Network

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