दीपावली पर मां महालक्ष्मी के पूजन से प्राप्त होती है सुख-शांति और समृद्धि: पं. अमर चन्द भारद्वाज, धनतेरस से भाई दूज तक जानें पांच दिवसीय दीपोत्सव का महत्व और शुभ मुहूर्त

दीपावली पर मां महालक्ष्मी के पूजन से प्राप्त होती है सुख-शांति और समृद्धि: पं. अमर चन्द भारद्वाज, धनतेरस से भाई दूज तक जानें पांच दिवसीय दीपोत्सव का महत्व और शुभ मुहूर्त

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गुरुग्राम, 5 नवंबर (न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क)। दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक भी है। यह पर्व असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देता है। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाले पांच दिवसीय दीपोत्सव का प्रत्येक दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आचार्य पुरोहित संघ, गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य तथा कथावाचक पं. अमर चन्द भारद्वाज ने दीपावली के महत्व और पांच दिवसीय दीपोत्सव की धार्मिक परंपराओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामायण की प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद माता सीता एवं लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से दीपोत्सव मनाने की परंपरा प्रचलित है। पं. भारद्वाज ने बताया कि उपनिषदों में भी प्रार्थना की गई है- ‘असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय।’ इसका अर्थ है कि हमें असत्य से सत्य, अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें। दीपावली का पर्व इसी आध्यात्मिक संदेश को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

6 नवंबर को धनतेरस, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

पं. अमर चन्द भारद्वाज ने बताया कि 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता महालक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य एवं आयुर्वेद का देवता, माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री, कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष तथा यमराज को मृत्यु का देवता माना जाता है। धनतेरस पर यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में प्रदोष काल शाम 5:34 बजे से रात 8:10 बजे तक रहेगा। स्थिर वृषभ लग्न में विशेष पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6:03 बजे से 7:59 बजे तक रहेगा। वहीं राहुकाल सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक रहेगा।

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली

7 नवंबर, शनिवार को नरक चतुर्दशी अर्थात छोटी दीपावली मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति से जुड़ा है। इस दिन अभ्यंग स्नान, घर की साफ-सफाई और दीप प्रज्वलित करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घरों में दीप जलाकर नकारात्मकता को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

8 नवंबर को दीपावली, मां महालक्ष्मी की होगी विशेष पूजा

पं. अमर चन्द भारद्वाज ने बताया कि 8 नवंबर, रविवार को दीपावली का मुख्य पर्व और महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। इस दिन अमावस्या तिथि सुबह 11:28 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। गुरुग्राम में प्रदोष काल शाम 5:32 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। स्थिर वृषभ लग्न में महालक्ष्मी पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त शाम 5:55 बजे से 7:51 बजे तक रहेगा।

उन्होंने बताया कि दीपावली पर भगवान गणेश, माता महालक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान विष्णु और कुबेर जी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को गणेश मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’, लक्ष्मी मंत्र ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’, सरस्वती मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ और कुबेर मंत्र ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय नमः’ का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। पूजन के लिए पूजा स्थल पर चौकी स्थापित कर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान करें। इसके बाद कलश स्थापित कर रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। बही-खातों और तिजोरी का पूजन करने के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें। घर के मुख्य द्वार, मंदिर और तुलसी के पौधे के समीप दीपदान भी अवश्य करना चाहिए।

9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग

पं. भारद्वाज ने बताया कि 9 नवंबर, सोमवार को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग रहेगा। इस दिन गंगा स्नान, पितृ तर्पण और दान का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु हरिद्वार अथवा अपने निकट के पवित्र जलाशय में स्नान और दान कर सकते हैं। पितरों की शांति और सद्गति के लिए ‘ॐ पितृभ्यो स्वधा नमः’ मंत्र का जप करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किए गए स्नान, दान और तर्पण से पुण्य की प्राप्ति होती है।

10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव

10 नवंबर, मंगलवार को विश्वकर्मा पूजा, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला से है, जब उन्होंने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर धारण किया था। पं. अमर चन्द भारद्वाज ने बताया कि गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 3:20 बजे से शाम 5:31 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है और अन्नकूट के रूप में विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है।

11 नवंबर को भाई दूज, बहनें करेंगी भाइयों की लंबी आयु की कामना

दीपोत्सव का अंतिम पर्व 11 नवंबर, बुधवार को भाई दूज अर्थात यम द्वितीया के रूप में मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका तिलक और सत्कार किया। बहन के प्रेम और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने भाई-बहन के मंगल और कल्याण का वरदान दिया था। इसी परंपरा के अनुसार भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को रोली और अक्षत का तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। गुरुग्राम में भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ समय दोपहर 1:11 बजे से 3:21 बजे तक रहेगा।पं. अमर चन्द भारद्वाज ने कहा कि दीपावली और दीपोत्सव के सभी पर्व भारतीय संस्कृति में परिवार, आपसी प्रेम, धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हैं। मां महालक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ हमें अपने जीवन में सदाचार, सेवा, परोपकार और सकारात्मकता को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से दीपोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक मर्यादाओं के साथ मनाने का आह्वान किया।

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Author: New India News Network

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