पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव के कारण इस अहम समुद्री मार्ग पर संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए एक तरह का अल्टीमेटम दे दिया है।
ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर चीन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में अमेरिका के साथ सहयोग नहीं करता, तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित शिखर बैठक टल सकती है। जानकारी के मुताबिक ट्रंप इस महीने के अंत में चीन की यात्रा करने वाले हैं, लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि अगर बीजिंग इस मुद्दे पर सहयोग नहीं करता तो यह दौरा स्थगित भी किया जा सकता है।
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। अनुमान के मुताबिक दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का संकट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि चीन को भी इस मार्ग की सुरक्षा में जिम्मेदारी निभानी चाहिए, क्योंकि चीन की तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पूरा होता है। ट्रंप ने दावा किया कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की वास्तविक निर्भरता करीब 45 से 50 प्रतिशत के आसपास है।
अमेरिका इस समय एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे तेल टैंकरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया जा सके। ट्रंप ने फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से भी इस मिशन में शामिल होने की अपील की है।
हालांकि फिलहाल अमेरिका को इस मामले में उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल रहा है। कई देशों ने अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। वहीं ईरान भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है और उसने संकेत दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को लेकर अंतिम फैसला उसके सैन्य अधिकारी करेंगे।
कुल मिलाकर होर्मुज जलडमरूमध्य का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या अमेरिका इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा पाता है या फिर यह टकराव और गहराता जाता है।







