16 मार्च 2026
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्ती के बीच भारत को बड़ी कूटनीतिक राहत मिली है। भारत के दो गैस टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि इसको लेकर उठ रहे सवालों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ किया है कि भारत और ईरान के बीच जहाजों की आवाजाही को लेकर कोई ‘ब्लैंकेट डील’ या व्यापक समझौता नहीं हुआ है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति हर बार अलग-अलग बातचीत के जरिए मिलती है। यानी हर जहाज के लिए अलग कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल ईरान के साथ बातचीत जारी है और इसी संवाद का नतीजा है कि दो भारतीय एलपीजी टैंकर सुरक्षित तरीके से इस अहम समुद्री रास्ते को पार कर पाए हैं।
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण कर दिया है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच भारत के दो एलपीजी टैंकर—‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’—होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। दोनों जहाजों में करीब 92 हजार टन एलपीजी भरी हुई है। इनमें से ‘शिवालिक’ गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है, जबकि ‘नंदा देवी’ कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा भारतीय ध्वज वाला एक क्रूड ऑयल टैंकर ‘जाग लाडकी’ भी फुजैरा से भारत के लिए रवाना हो चुका है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात से भी इनकार किया कि इसके बदले में भारत ने ईरान को कोई विशेष रियायत दी है। उन्होंने कहा कि यह कोई लेन-देन का मामला नहीं है, बल्कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और कूटनीतिक संवाद का परिणाम है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि अभी कई भारतीय जहाज उस क्षेत्र में मौजूद हैं और उनके सुरक्षित मार्ग को लेकर बातचीत जारी है। उनका कहना है कि संवाद और समन्वय के जरिए समाधान निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच भी फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे तनावपूर्ण हालात में भारत का कूटनीतिक रास्ता अपनाना एक महत्वपूर्ण रणनीति है। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन भी बनाए रखने में सहयोग मिलता है।
कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों का सुरक्षित गुजरना भारत की सक्रिय कूटनीति का नतीजा माना जा रहा है, लेकिन विदेश मंत्री ने साफ कर दिया है कि यह किसी स्थायी समझौते का हिस्सा नहीं बल्कि हर जहाज के लिए अलग-अलग बातचीत का परिणाम है।







