नई दिल्ली 15 सितम्बर / दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के नौ परमाणु-सशस्त्र देशों ने अपने मिसाइलों और अन्य डिलीवरी सिस्टम पर तैनात परमाणु वॉरहेड्स की संख्या बढ़ाई है। कई वर्षों बाद पहली बार तैनात परमाणु वॉरहेड्स में इस तरह की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।SIPRI के अनुमान के अनुसार, जनवरी 2026 तक करीब 4,012 परमाणु वॉरहेड्स मिसाइलों और बॉम्बर बेस पर तैनात थे। यह जनवरी 2025 के अनुमान से लगभग 100 अधिक है। इस बढ़ोतरी में रूस के परमाणु वॉरहेड्स की तैनाती का नया आकलन और चीन तथा भारत द्वारा नए वॉरहेड्स की तैनाती प्रमुख वजह मानी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2,100 से 2,200 वॉरहेड्स बैलिस्टिक मिसाइलों पर हाई ऑपरेशनल अलर्ट की स्थिति में थे। इनमें अधिकांश रूस और अमेरिका के थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास भी कुछ वॉरहेड्स हाई अलर्ट पर हैं। SIPRI का आकलन है कि चीन और भारत ने भी सीमित संख्या में वॉरहेड्स को हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर रखना शुरू किया है।परमाणु हथियारों के कुल भंडार के मामले में रूस सबसे आगे है। जनवरी 2026 तक रूस के पास अनुमानित 5,420 परमाणु वॉरहेड्स थे। इनमें से करीब 1,796 तैनात थे, जो पिछले साल के मुकाबले 78 अधिक हैं। अमेरिका के पास कुल करीब 5,042 वॉरहेड्स हैं।
वहीं चीन के परमाणु हथियारों का भंडार बढ़कर 620 हो गया है। भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु वॉरहेड्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170, ब्रिटेन के पास 225 और फ्रांस के पास 370 वॉरहेड्स हैं। इजरायल के पास करीब 90 और उत्तर कोरिया के पास लगभग 60 परमाणु वॉरहेड्स होने का अनुमान है।SIPRI के मुताबिक, भारत ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार में करीब 10 वॉरहेड्स की बढ़ोतरी की है। भारत ने पहली बार अनुमानित 12 परमाणु वॉरहेड्स को मिसाइलों पर तैनात किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है और जमीन, हवा तथा समुद्र से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम सिस्टम को विकसित और अपग्रेड कर रहा है।

हालांकि पुराने परमाणु वॉरहेड्स को हटाने और नष्ट करने की प्रक्रिया के चलते दुनिया में परमाणु हथियारों की कुल संख्या में मामूली कमी आई है। जनवरी 2025 में वैश्विक परमाणु भंडार करीब 12,241 था, जो जनवरी 2026 में घटकर 12,187 रह गया। इसके बावजूद सैन्य स्टॉक और तैनात वॉरहेड्स में बढ़ोतरी ने वैश्विक परमाणु जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा दी है।








