गुरुग्राम/रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर जाम, गलत दिशा में वाहन चलाने, लेन अनुशासन और अवैध पार्किंग की समस्या को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब आरटीआई के जरिए सामने आए आंकड़ों ने हाईवे पर यातायात व्यवस्था और कार्रवाई के बीच के अंतर को सामने ला दिया है। गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खरखड़ा की ओर से लगातार उठाए जा रहे इस मुद्दे को लेकर एनएचएआई से मांगी गई जानकारी में वर्ष 2025 के दौरान किए गए चालानों और यातायात प्रबंधन से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
गलत दिशा में वाहन चलाने के 7,957, लेन बदलने के 14,036 और अवैध पार्किंग के 870 चालान

आरटीआई के अनुसार खेड़की दौला से सिधरावली तक वर्ष 2025 में लेन बदलने के 14,036, गलत दिशा में वाहन चलाने के 7,957 और गलत/अवैध पार्किंग के 870 चालान किए गए। इन तीन श्रेणियों में कुल 22,863 चालान दर्ज किए गए।
आंकड़ों की यह संख्या बताती है कि हाईवे पर यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। लेकिन दूसरी ओर, जाम, गलत दिशा में वाहन चलाने और सर्विस लेन में भारी वाहनों की पार्किंग जैसी समस्याओं के बने रहने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि बड़ी संख्या में चालान किए जाने के बावजूद इन समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया।
लेन बदलने के सबसे ज्यादा मामले

आरटीआई में सामने आए आंकड़ों में सबसे अधिक मामले लेन बदलने से संबंधित हैं। वर्ष 2025 में कुल 14,036 चालान लेन बदलने के मामलों में किए गए।
हाईवे पर लगातार लेन बदलने से यातायात की गति और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विशेषकर भारी यातायात वाले हिस्सों में लेन अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। हजारों चालानों के बावजूद इस तरह के उल्लंघन सामने आना यातायात अनुशासन की चुनौती को दर्शाता है।
इसके बाद 7,957 चालान गलत दिशा में वाहन चलाने के मामलों में किए गए। हाईवे पर गलत दिशा में वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर यातायात उल्लंघन माना जाता है। इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आने से यह भी सवाल उठता है कि गलत दिशा में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए केवल चालान के अलावा अन्य स्थायी उपाय कितने प्रभावी हैं।
वहीं, 870 चालान गलत या अवैध पार्किंग के मामलों में किए गए। इसके बावजूद सर्विस लेन और हाईवे के आसपास भारी वाहनों की पार्किंग की शिकायतें बनी रहने की बात सामने आई है।
कार्रवाई और जमीनी स्थिति में अंतर

एनएच-48 पर यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े तो सामने हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक ओर 22,863 चालान किए गए, वहीं दूसरी ओर हाईवे पर जाम, सर्विस लेन में भारी वाहनों की पार्किंग और गलत दिशा में वाहनों के संचालन जैसी समस्याएं लगातार सामने आने का दावा किया जा रहा है।
इससे यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या केवल चालान की संख्या बढ़ने से यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव है या इसके लिए हाईवे के डिजाइन, पार्किंग व्यवस्था, डायवर्जन, निर्माण प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी समान रूप से काम करने की जरूरत है।
ठेकेदारों पर कार्रवाई के रिकॉर्ड में ‘NIL’
आरटीआई से सामने आई जानकारी का सबसे अहम हिस्सा हाईवे पर चल रहे निर्माण कार्यों और यातायात प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारी को लेकर है।
जानकारी के अनुसार एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, रेवाड़ी की ओर से जाम, गलत दिशा में वाहन चलाने, अवैध पार्किंग, निर्माण क्षेत्र की सुरक्षा और डायवर्जन व्यवस्था जैसे विषयों को लेकर संबंधित अधिकारियों से पत्राचार किया गया।
लेकिन इन व्यवस्थाओं में कमियों के लिए संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ
नोटिस, चेतावनी या पेनल्टी की कार्रवाई के रिकॉर्ड में ‘NIL’ दर्ज है।
यानी आरटीआई में वाहन चालकों के खिलाफ हजारों चालानों का रिकॉर्ड उपलब्ध है, जबकि निर्माण कार्य और यातायात प्रबंधन से जुड़ी कमियों के लिए ठेकेदार एजेंसियों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड शून्य बताया गया है।
यही बिंदु अब हाईवे की व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
वटिका चौक और शिखोपुर एक्सटेंशन का मामला
दस्तावेजों में वटिका चौक के आसपास तथा शिखोपुर एक्सटेंशन सर्विस लेन के सामने भारी वाहनों की पार्किंग और अनधिकृत मरम्मत जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है।
सर्विस लेन पर भारी वाहनों के खड़े रहने से स्थानीय यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ सड़क की उपलब्ध चौड़ाई भी कम हो सकती है। इसके अलावा सड़क किनारे वाहनों की मरम्मत की गतिविधियां भी यातायात संचालन में बाधा पैदा कर सकती हैं।
ऐसे मामलों को लेकर हाईवे ट्रैवल ऐप, व्हाट्सऐप हेल्पलाइन और 1033 जैसी शिकायत व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद यदि ऐसी समस्याएं दोबारा सामने आती हैं तो शिकायत निवारण और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ट्रैफिक पुलिस ने मांगे अतिरिक्त संसाधन
आरटीआई दस्तावेजों में ट्रैफिक पुलिस की ओर से हाईवे पर बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस की ओर से अतिरिक्त बल, स्थायी क्रेन/हाइड्रा, रिकवरी वाहन, प्रशिक्षित ट्रैफिक मार्शल और बेहतर डायवर्जन, बैरिकेडिंग एवं साइनेज की आवश्यकता बताई गई।
इससे यह स्पष्ट होता है कि एनएच-48 पर यातायात प्रबंधन की चुनौती केवल नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। सड़क पर निर्माण कार्य चलने के दौरान वाहनों की आवाजाही, डायवर्जन व्यवस्था, पार्किंग नियंत्रण और आपात स्थिति में खराब या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
स्थायी क्रेन और रिकवरी वाहन उपलब्ध होने से हाईवे पर खराब या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जल्द हटाया जा सकता है। वहीं प्रशिक्षित ट्रैफिक मार्शल और बेहतर साइनेज से डायवर्जन वाले हिस्सों में वाहन चालकों को दिशा संबंधी जानकारी देने में मदद मिल सकती है।
प्रकाश खरखड़ा लगातार उठा रहे हैं मामला
गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खरखड़ा लंबे समय से एनएच-48 पर यातायात और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।
उनकी ओर से आरटीआई के माध्यम से सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी हासिल की गई। इस जानकारी में चालानों की संख्या के साथ-साथ यातायात प्रबंधन और निर्माण कार्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी सामने आई है।
इस अभियान के जरिए हाईवे पर जाम, गलत दिशा में वाहन चलाने, अवैध पार्किंग, सर्विस लेन के इस्तेमाल, निर्माण कार्यों के दौरान डायवर्जन और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों को सामने रखा जा रहा है।
चालान की संख्या से आगे स्थायी समाधान का सवाल
एनएच-48 पर वर्ष 2025 में 22,863 चालान किए जाने का आंकड़ा प्रवर्तन की व्यापकता को दर्शाता है। इनमें 14,036 लेन बदलने, 7,957 गलत दिशा में वाहन चलाने और 870 अवैध/गलत पार्किंग से जुड़े हैं।
लेकिन इन आंकड़ों के साथ ही यह सवाल भी सामने आता है कि क्या यातायात उल्लंघनों पर कार्रवाई के साथ उन परिस्थितियों को दूर किया जा रहा है जिनके कारण ये समस्याएं बार-बार पैदा होती हैं।
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों ने एनएच-48 की यातायात व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अंतर को सामने रखा है।
यदि सर्विस लेन पर भारी वाहन खड़े होते हैं, निर्माण कार्य के दौरान डायवर्जन व्यवस्था प्रभावित होती है या गलत दिशा में वाहन चलाने की घटनाएं लगातार होती हैं, तो केवल चालान करने के बजाय इन समस्याओं के मूल कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
आरटीआई में ठेकेदारों पर नोटिस, चेतावनी या पेनल्टी की कार्रवाई के रिकॉर्ड में ‘NIL’ दर्ज होना इस मामले को और महत्वपूर्ण बना देता है। इससे हाईवे पर निर्माण एवं यातायात प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल सामने आते हैं।
हाईवे व्यवस्था पर व्यापक निगरानी की जरूरत
दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर बड़ी संख्या में निजी वाहन, व्यावसायिक वाहन और भारी वाहन चलते हैं। ऐसे में यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए प्रवर्तन के साथ-साथ पार्किंग नियंत्रण, निर्माण प्रबंधन, सुरक्षित डायवर्जन, बैरिकेडिंग, साइनेज, क्रेन और रिकवरी व्यवस्था का भी सुचारू होना जरूरी है।
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों ने एनएच-48 की यातायात व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अंतर को सामने रखा है। वाहन चालकों के खिलाफ 22,863 चालान का रिकॉर्ड मौजूद है, जबकि ठेकेदारों के खिलाफ नोटिस, चेतावनी या पेनल्टी की कार्रवाई के कॉलम में ‘NIL’ दर्ज है।








