नई दिल्ली, 6 नवंबर (न्यू इंडिया न्यूज नेटवर्क)। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का कहर लगातार लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा है। सुबह होते ही लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और प्रदूषित हवा के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। दिल्ली-NCR के साथ लगते हरियाणा के गुरुग्राम में भी प्रदूषण की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार विभाग स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण करने में नाकाम नजर आ रहा है। गुरुग्राम के कई इलाकों में लोगों को प्रदूषण के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों को लेकर भी नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का सवाल है कि जब प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने अधिकारियों की तैनाती की है, तो इसके बावजूद हालात में सुधार क्यों नहीं हो रहा?

अधिकारियों की तैनाती के बावजूद प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं
आरोप है कि हरियाणा सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए दक्षिण और उत्तर जोन में अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद गुरुग्राम में प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है कि कागजों और रिपोर्टों में प्रदूषण नियंत्रण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि प्रदूषण को लेकर लापरवाही के मामलों में हरियाणा के मुख्यमंत्री की ओर से पहले भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पॉलिथीन जलाने पर रोक लगाने में भी विभाग नाकाम?
गुरुग्राम में प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह खुले में कचरा और पॉलिथीन जलाने की समस्या को भी बताया जा रहा है। आरोप है कि शहर के कई हिस्सों में दिन-रात पॉलिथीन और कचरा जलाया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। पॉलिथीन जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण को और प्रदूषित करता है। इसके बावजूद खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ सख्ती और नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दो जोन, अधिकारियों की फौज, फिर भी जनता परेशान
हरियाणा सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए उत्तर और दक्षिण जोन बनाए हुए हैं। दोनों जोन में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद गुरुग्राम में प्रदूषण की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अधिकारियों की इतनी बड़ी व्यवस्था होने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास जमीन पर प्रभावी क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं? दिल्ली-NCR में प्रदूषण की मार झेल रहे लोगों को अब केवल सरकारी दावों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है। गुरुग्राम में पॉलिथीन जलाने पर रोक, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गुरुग्राम के लोगों को जहरीली हवा से राहत कब मिलेगी और प्रदूषण नियंत्रण विभाग अपनी जिम्मेदारी कब पूरी करेगा?







