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फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला: संसद में गूंजा मुद्दा, सुरक्षा और राज्य के दर्जे पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली,12 मार्च 2026

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। इस घटना को लेकर राज्यसभा में जोरदार बहस देखने को मिली, जहां विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए, वहीं केंद्र सरकार ने मामले की पूरी जांच का भरोसा दिया।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। उनका कहना था कि अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो इस तरह की घटना नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की होती तो फारूक अब्दुल्ला की जान जा सकती थी

खरगे ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, क्योंकि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ा है।

इन आरोपों पर केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि फारूक अब्दुल्ला पर हमला एक गंभीर और चिंताजनक घटना है और सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि घटना की गहन जांच की जाएगी और हमलावर के मंसूबों का भी पता लगाया जाएगा।

जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर घटना को राजनीतिक नजरिए से देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच के सरकार पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।

दरअसल बुधवार रात जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक शादी समारोह के दौरान फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने की कोशिश की गई थी। बताया जा रहा है कि हमलावर ने पिस्तौल से गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी के कारण बड़ी घटना टल गई और फारूक अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए

हमले के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को तुरंत पकड़ लिया। आरोपी की पहचान जम्मू के पुरानी मंडी इलाके के 63 वर्षीय कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने की योजना बना रहा था

घटना के समय जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी फारूक अब्दुल्ला के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई नहीं की होती तो बड़ा हादसा हो सकता था

इस घटना के बाद कई राजनीतिक नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस हमले के पीछे असल मंशा क्या थी और कहीं इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं है।

सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Author: New India News Network

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