Edition

मिडिल ईस्ट तनाव का असर, बाजार में हलचल ! रुपया हुआ कमजोर! डॉलर के मुकाबले फिर गिरी रुपये की कीमत !

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

12 मार्च 2026।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

गुरुवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया गिरकर 92.36 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड इंट्रा-डे निचले स्तर तक पहुंच गया। रुपये में करीब 35 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार की शुरुआत 92.25 प्रति डॉलर पर हुई थी, लेकिन दिन भर लगातार दबाव बना रहा और यह नया रिकॉर्ड लो छू गया।

इस गिरावट की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह लगभग 98 से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये पर दबाव के तीन बड़े कारण हैं —

  1. पहला, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें।
  2. दूसरा, अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती।
  3. और तीसरा, विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से लगातार निकासी।

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली।
BSE Sensex करीब 445 अंक गिरकर 76,418 के स्तर पर आ गया, जबकि
Nifty 50 भी 121 अंक टूटकर 23,745 पर पहुंच गया।

एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सिर्फ एक दिन में ही लगभग 6,200 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ गया।

दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती भी जारी है।
डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को मापता है, बढ़कर लगभग 99.40 के स्तर पर पहुंच गया।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं और पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में रुपया 93 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

हालांकि बाजार में यह भी चर्चा है कि जरूरत पड़ने पर
Reserve Bank of India रुपये को स्थिर रखने के लिए डॉलर की बिक्री जैसे कदम उठा सकता है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

New India News Network
Author: New India News Network

new india news network

Leave a Comment

और पढ़ें