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मनुष्य को अपने शुभ-अशुभ कर्मों का फ ल अवश्य ही भोगना चाहिए, नेहा साईं।

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मनुष्य को अपने शुभ-अशुभ कर्मों का फ ल अवश्य ही भोगना चाहिए, नेहा साईं।
तावडू, 11 जुलाई (नरेश मैहंदीरत्ता): ईश्वर नाम के जाप का महत्व तो सभी को विदित ही हैए जो हमें पापों से बचाकर कुवृत्तियों से हमारी रक्षा कर, जन्म तथा मृत्यु के बंधन से छुडा देता है। यह आत्म शुद्धि के लिए एक उत्तम साधन है, जिसमें न किसी सामग्री की आवश्यकता है और न किसी नियम के बंधन की। इससे सुगम और प्रभावकारी साधन अन्य कोई नहीं। यह विचार शहर के वार्ड नंबर 14 में स्थित श्रीसाईं धाम मंदिर में नेहा साईं ने रखे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने शुभ अशुभ कर्मों का फ ल अवश्य ही भोगना चाहिए। यदि भोग अपूर्ण रह गया तो पुनर्जन्म धारण करना पड़ेगा, इसलिए मृत्यु से यह श्रेयस्कर है कि कुछ काल तक उन्हें सहन कर पूर्व जन्मों के कर्मों का भोग समाप्त कर सदैव के लिए मुक्त हो जाओ। बाबा ने कहा कि मुझ पर पूर्ण विश्वास रखो, यद्यपि मैं देहत्याग भी कर दूंगा, परन्तु फि र भी मेरी अस्थियां आशा और विश्वास का संचार करती रहेंगी। केवल मैं ही नहीं, मेरी समाधि भी वार्तालाप करेगी, चलेगी, फिरेगी और उन्हें आशा का संदेश पहुंचाती रहेगी, जो अनन्य भाव से मेरे शरणागत होंगे। निराश न होना कि मैं तुमसे विदा हो जाऊंगा। तुम सदैव मेरी अस्थियों को भक्तों के कल्याणार्थ ही चिंतित पाओगे।

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Author: New India News Network

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