दिल्ली , 10 जुलाई
जिस प्रकार से किसी स्टार्टअप को एक आईडिया हिट होकर उसको यूनिकॉर्न बनाने में मदद करता है , ठीक इसी प्रकार कोई घटना दिल को छू जाए तो मानवीय संवेदना उसको सेवा में बदल कर समाज में परिवर्तन ला देती है।
ऐसा ही एक वाक़्यात हुआ हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के साथ। उनके समक्ष आई एक दुःखदायी पीड़ा ने जन्म दिया हरियाणा में “टेली-ईसीजी सेवा” नाम की योजना को।
यह योजना आज हरियाणा में दिल के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। “टेली-ईसीजी सेवा” धरातल पर कितनी कारगर साबित हो रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआत के कुछ ही समय के भीतर अब तक राज्य भर में 2,688 मरीजों को यह सेवा प्रदान की जा चुकी है।
आपको यहां बताना वाज़िब होगा कि इस क्रांतिकारी टेली-ईसीजी सेवा की शुरुआत के पीछे प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की गहरी मानवीय संवेदना और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही जुड़ी है।
दरअसल, कुछ समय पहले स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में एक अत्यंत दुखद मामला आया था, जहाँ एक उप-मंडल स्वास्थ्य केंद्र (SDH) में दिल के दौरे से पीड़ित एक मरीज समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ बैठा। उस केंद्र पर ईसीजी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण मरीज के दिल की वास्तविक स्थिति और हार्ट अटैक के अंदेशे का समय रहते पता नहीं चल सका। यदि वहां ईसीजी की व्यवस्था होती, तो रिपोर्ट के आधार पर मरीज को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर ही तुरंत किसी बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में रेफर कर उसकी जान बचाई जा सकती थी।
एक आम नागरिक की इस तरह ईसीजी न होने के कारण हुई अकाल मृत्यु की खबर ने स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव को अंदर तक झकझोर दिया और वे बेहद भावुक हो उठीं। उन्होंने इस त्रासदी को केवल एक घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी उप-मंडल स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक हर स्तर पर ईसीजी की अनिवार्य सुविधा शुरू की जाए। स्वास्थ्य मंत्री की इसी संवेदनशीलता, दूरदर्शी सोच और तत्परता का नतीजा है कि आज हरियाणा के 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टेली-ईसीजी सेवा धरातल पर उतर चुकी है, जो अब तक 131 से अधिक गंभीर मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो चुकी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टेली-ईसीजी सेवा की इस त्वरित जांच प्रणाली के माध्यम से मात्र सवा महीने में 131 बेहद गंभीर (क्रिटिकल) मामलों की समय रहते पहचान की गई, जिससे उन्हें तुरंत उचित इलाज मिल सका और उनकी जान बचाई जा सकी।
आपको बता दें कि इस दूरदर्शी स्वास्थ्य सेवा का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला से 29 मई 2026 को किया था , इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी उपस्थित थी। इस योजना के तहत राज्य के कुल 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को कवर किया गया है। इनमें 71 जिला नागरिक अस्पताल एवं उप-मंडल नागरिक अस्पताल, 121 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और 408 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) शामिल हैं। इस सेवा के चालू होने से अब ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उनके घर के नजदीक ही विशेषज्ञ हृदय रोग निदान की सुविधा मिलने लगी है, जिससे मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी और इलाज में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।
हरियाणा सरकार की इस पहल को राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को डिजिटल रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के त्वरित इलाज और सटीक जांच के लिए राज्य में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर टेली-ईसीजी सेवाओं की शुरुआत की गई है। इस महत्वाकांक्षी डिजिटल स्वास्थ्य पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी जिला नागरिक अस्पतालों , उप-मंडल अस्पतालों , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर हृदय संबंधी आपातकालीन स्थितियों, जैसे कि एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक), अतालता (Arrhythmia) और अन्य गंभीर विकारों के प्रबंधन को मजबूत करना है।








