AC ट्रेनों से 4 साल में गायब हुए 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम, रेलवे को 104 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
नई दिल्ली, 15 जुलाई। भारतीय रेलवे की एसी ट्रेनों में यात्रियों को सफर के दौरान दी जाने वाली बेडरोल सुविधा अब रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच देशभर की एसी ट्रेनों से 1 करोड़ 27 लाख से अधिक बेडरोल आइटम गायब हो गए। इनकी अनुमानित कीमत 104.51 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह जानकारी 16 रेलवे जोनों के 54 रेलवे डिवीजनों से प्राप्त जवाबों के संकलन पर आधारित है।
हर रात लाखों यात्रियों को मिलती है बेडरोल सुविधा
भारतीय रेलवे की एसी ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सफर के दौरान बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाती है। इसमें सामान्यतः दो बेडशीट, एक तकिया, एक तकिए का कवर, एक फेस तौलिया और मौसम के अनुसार कंबल दिया जाता है। यात्रा पूरी होने के बाद कोच अटेंडेंट इन सभी वस्तुओं को वापस एकत्र करता है और उनकी गिनती करता है। इसी प्रक्रिया के दौरान लगातार बड़ी संख्या में सामान के गायब होने के मामले सामने आए हैं।
सबसे ज्यादा गायब हुए फेस तौलिए
RTI के अनुसार सबसे अधिक चोरी फेस तौलियों की हुई। आंकड़ों के मुताबिक चार वर्षों में—
- 46.54 लाख से अधिक फेस तौलिए
- 41.13 लाख से अधिक बेडशीट
- 23.59 लाख से अधिक तकिए के कवर
- 12.95 लाख कंबल
- लगभग 2.76 लाख तकिए
गायब हुए। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि छोटे आकार के कारण तौलिए सबसे अधिक आसानी से साथ ले जाए जाते हैं।
लगातार बढ़ी चोरी की घटनाएं
आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि 2022 की तुलना में 2025 तक बेडरोल सामग्री गायब होने की घटनाओं में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कोविड-19 महामारी के बाद जनवरी 2022 से बेडरोल सेवा पूरी तरह बहाल होने के बाद यह समस्या लगातार बढ़ी है।
किन डिवीजनों में सबसे ज्यादा नुकसान?
RTI के अनुसार कुल बेडरोल सामग्री के गायब होने के मामलों में बीकानेर रेलवे डिवीजन सबसे ऊपर है। इसके बाद रांची और दिल्ली का स्थान है।
वहीं अलग-अलग वस्तुओं के आधार पर भी अलग तस्वीर सामने आई—
- दिल्ली डिवीजन में सबसे अधिक फेस तौलिए गायब हुए।
- जोधपुर डिवीजन में सबसे अधिक कंबल गायब हुए।
- सोनपुर डिवीजन में सबसे अधिक तकिए के कवर गायब हुए।
क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह है?
उपलब्ध आंकड़े केवल यह बताते हैं कि बड़ी संख्या में बेडरोल सामग्री गायब हुई है। इनसे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह ही जिम्मेदार है। हालांकि, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस ने कई मामलों में रेलवे का चोरी हुआ सामान कबाड़ियों और कुछ व्यक्तियों के कब्जे से बरामद किया है। वहीं रेलवे का कहना है कि चोरी रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
नुकसान का असर सिर्फ रेलवे पर नहीं
रेलवे अधिकारियों के अनुसार जब बेडरोल सामग्री गायब होती है तो अगली यात्रा के लिए नया स्टॉक खरीदना पड़ता है। इससे रेलवे के साथ-साथ बेडरोल उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ता है। कई मामलों में अनुबंध की शर्तों के अनुसार कमी का भार एजेंसियों पर भी आता है।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा जरूरी
रेलवे की बेडरोल सामग्री सार्वजनिक धन से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधा का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों द्वारा इन वस्तुओं को अपने साथ ले जाना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना भी है। यदि इस तरह का नुकसान कम हो तो रेलवे यात्रियों की सुविधाओं के विस्तार, स्टेशन आधुनिकीकरण और अन्य सेवाओं पर अधिक निवेश कर सकता है।
रेलवे यात्रियों से अपील करता है कि यात्रा समाप्त होने पर बेडरोल की सभी वस्तुएं कोच में ही छोड़ें, ताकि यह सुविधा आने वाले यात्रियों को भी सुचारु रूप से मिलती रहे।







