हरियाणा 29 सितंबर / 29 सितंबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आयुष्मान भारत व चिरायु योजना के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु स्वास्थ्य विभाग प्रो-एक्टिव होकर कार्य करे। जिन सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी उनके चिकित्सकों, सहायक स्टाफ तथा आयुष्मान मित्रों को स्पेशल इन्सेंटिव (विशेष प्रोत्साहन) राशि दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने यह बात मंगलवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में स्थास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत व चिरायु योजना के मरीजों के इलाज की एवज में सरकारी अस्पतालों को जो राशि मिलेगी उसका उपयोग संबंधित अस्पताल में चिकित्सकों व स्टाफ के स्पेशल इन्सेंटिव, अस्पताल के अपग्रेडेशन, स्वच्छता कार्यों, आयुष्मान मित्रों को प्रोत्साहन आदि में खर्च किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्तुत किए गए स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव का सरकार द्वारा अनुमोदन कर दिया गया है।

डायबिटिक रैटिनोपैथी का होगा निःशुल्क इलाज:
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि निःशुल्क इलाज का दायरा अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के पैकेजों की संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि आंखों के मरीजों की पुतली खराब होने की बीमारी डायबिटिक रैटिनोपैथी का इलाज भी सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क किया जाएगा। इसे भी सरकारी अस्पतालों के पैकेज में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज अब इंजेक्शन के माध्यम से संभव हो गया है जिसे लगाने का खर्च सरकार वहन करेगी।
नियमित के साथ ओपन भर्ती भी शुरू करने के निर्देश:
मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों, रेडियोलोजिस्ट और कार्डियोलोजिस्ट के रिक्त पदों को तुरंत भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमित भर्ती के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग इन पदो ंके लिए विदेशों की तर्ज पर ओपन भर्ती भी शुरू करे जिसके अंतर्गत कोई भी इच्छुक स्पेशलिस्ट अपनी मर्जी के स्थान और समय अवधि के लिए सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने की पेशकश कर सके। ऐसा करने से सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट्स की कमी दूर होगी और मरीजों को इसका काफी लाभ मिलेगा। रेडियोलॉजिस्ट के मामले में एनएमसी में पंजीकृत रेडियोलोजिस्ट की सूची के आधार पर सेवानिवृत्त रेडियोलोजिस्ट्स की सेवाएं उनके निकटवर्ती अस्पतालों में ली जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इन्हें आयु सीमा की छूट भी दी जाएगी।

निजी अस्पतालों के चिकित्सक भी कर सकेंगे सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन:
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों में कार्यरत तथा निजी प्रेक्टिस करने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों की सरकारी अस्पतालों में भी सेवाएं ली जा सकती है जिन्हें प्रतिदिन अथवा प्रति ऑपरेशन के आधार पर भुगतान किया जा सकता है। इसके साथ ही जो सरकारी चिकित्सक अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं उन्हें विशेष रूप से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी ताकि वे अधिक लगन के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित हो सकें। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में जरूरत के अनुसार आयुष्मान मित्रों की संख्या बढ़ाने के संबंध में भी निर्देश दिए।
सरकारी अस्पतालों की होगी रियल टाईम मॉनिटरिंग:
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला, उपमंडल स्तरीय अस्पतालों तथा सीएचसी, पीएचसी व सब-सेंटर्स को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाने का कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। इसके लिए मरीज के पंजीकरण से लेकर उसके सभी प्रकार के टेस्ट, चिकित्सकीय परामर्श और दवाई देने तक के कार्यों को रियल टाइम दर्ज किया जाए ताकि अस्पतालों की सभी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।
खराब उपकरण तुरंत ठीक करवाए जाएं:
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लगाए गए उपकरणों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई उपकरण खराब हो…मुख्यमंत्री ने मरीजों को राहत देने के लिए ई-उपचार के उपयोग, नशा मुक्ति केंद्रों के प्रभावी संचालन, आयुष्मान व चिरायु योजना के पात्र व्यक्यिों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए विशेष अभियान चलाने, अस्पतालों में साफ-सफाई के कार्यों पर विशेष ध्यान देने, आयुष्मान क्लेम की निगरानी हेतु नियमित रिपोर्टिंग करने, निजी व सरकारी अस्पतालों में पैकेजवार तुलना सहित स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए पिछली बैठक में दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा किए गए कार्यों की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमित मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के सचिव सीजी रजनीकांथन, निदेशक धीरेंद्र खड़गटा, मुख्यमंत्री के उप-प्रधान सचिव डॉ. यशपाल सिंह, स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल, एनएचएम के प्रबंध निदेशक डॉ. रिपुदमन सिंह ढिल्लों तथा डॉ. मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।









