11 मार्च 2026।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद टीम इंडिया के जश्न पर अब सियासी और खेल जगत में विवाद छिड़ गया है। पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के एक बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया है। कीर्ति आजाद ने टीम इंडिया द्वारा वर्ल्ड कप ट्रॉफी को अहमदाबाद के हनुमान मंदिर ले जाने पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है।
दरअसल टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे। लेकिन इस पर पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर सवाल खड़े कर दिए।
कीर्ति आजाद का कहना था कि भारतीय टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी हैं, इसलिए ट्रॉफी को केवल मंदिर ही क्यों ले जाया गया। उन्होंने कहा कि यह जीत 140 करोड़ भारतीयों की है, इसलिए ट्रॉफी को मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे भी ले जाना चाहिए था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और खेल जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने कीर्ति आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे बयान खिलाड़ियों की उपलब्धि को कम करने वाले हैं। गंभीर ने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है और हमें वर्ल्ड कप जीत का जश्न मनाना चाहिए, न कि इस तरह के विवाद खड़े करने चाहिए।
वहीं पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने भी कीर्ति आजाद के बयान को लेकर नाराज़गी जताई। हरभजन सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों की आस्था पर सवाल उठाना गलत है। अगर किसी खिलाड़ी ने मन्नत मांगी थी और जीत के बाद मंदिर जाकर मत्था टेका, तो इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
हरभजन ने कहा कि खिलाड़ी अपनी इच्छा से कहीं भी जा सकते हैं—चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो, चर्च हो या गुरुद्वारा। देश ने वर्ल्ड कप जीता है और ऐसे समय में राजनीति करने के बजाय जश्न मनाना चाहिए।
इस विवाद पर जब युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने भी बेहद संतुलित जवाब दिया। ईशान किशन ने कहा कि टीम ने शानदार वर्ल्ड कप जीता है और इस समय खुशी मनाने का वक्त है, इसलिए बेहतर होगा कि इसी बारे में सवाल किए जाएं।
बता दें कि कीर्ति आजाद 1983 की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 7 टेस्ट और 25 वनडे मैच खेले हैं। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और फिलहाल वह तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं।
फिलहाल इस बयान को लेकर खेल और राजनीति दोनों ही गलियारों में बहस जारी है। एक तरफ कुछ लोग इसे खिलाड़ियों की व्यक्तिगत आस्था बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ इसे विवाद का विषय बना रहे हैं। लेकिन टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत के बीच यह मुद्दा अब चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है।









