दिल्ली, 11 मार्च 2026
लोकसभा में इन दिनों राजनीतिक माहौल काफी गरम है। स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर दूसरे दिन भी जोरदार बहस जारी रही। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
बहस की शुरुआत
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने बहस की शुरुआत की। उन्होंने विपक्ष और खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज़ादी के बाद बहुत कम बार ऐसा हुआ है जब लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो। उनका कहना था कि स्पीकर के पद को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद की मर्यादा का सम्मान नहीं करते और अक्सर प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हैं। उनके इस बयान के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और विपक्षी सांसद वेल तक पहुंच गए।
राहुल गांधी का जवाब
हंगामे के बीच राहुल गांधी को अपनी बात रखने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि यह चर्चा किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्पीकर की भूमिका से जुड़ी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष अपनी बात रखना चाहता है, उसे रोका जाता है।
राहुल गांधी ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने सदन में बोलने की कोशिश की थी, उन्होंने प्रधानमंत्री के फैसलों और समझौतों को लेकर सवाल उठाया था। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को “कॉम्प्रोमाइज्ड” कहा, जिस पर बीजेपी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।
रविशंकर प्रसाद का पलटवार
इसके बाद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत का प्रधानमंत्री कभी भी समझौता करने वाला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर संसद में अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर रहा है और स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव टिकने वाला नहीं है।
बहस के दौरान आपातकाल का मुद्दा भी उठाया गया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक दर्दनाक दौर था, जब कई बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था।
विपक्ष और सरकार के आरोप-प्रत्यारोप
उधर विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष नहीं हैं और विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जाता। वहीं सरकार का कहना है कि स्पीकर पूरी निष्पक्षता के साथ सदन चलाते हैं और विपक्ष बेवजह विवाद खड़ा कर रहा है।
फिलहाल इस अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी है और उम्मीद है कि आगे भी संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।







